Edited By Tanuja,Updated: 22 Feb, 2026 05:55 PM

ईरान में विश्वविद्यालयों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गए। छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं और सर्वोच्च नेता के खिलाफ नारे लगे। 40वें दिन की शोक सभाओं के बीच भड़की अशांति परमाणु वार्ता और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच नेतृत्व के लिए बड़ी...
International Desk: ईरान में शनिवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने एक बार फिर उग्र रूप ले लिया। राजधानी तेहरान और मशहद सहित कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। जनवरी में हुई कार्रवाई के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित शोक सभाओं के दौरान यह विरोध दोबारा भड़क उठा।तेहरान स्थित Sharif University of Technology और Amirkabir University of Technology से सामने आए वीडियो में छात्र ‘तानाशाह की मौत’ और ‘आज़ादी’ के नारे लगाते दिखे। कुछ समूहों ने सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के खिलाफ भी नारेबाजी की।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े बसीज अर्धसैनिक बलों की कैंपस में तैनाती के बाद छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। ईरान की परंपरा में मौत के 40वें दिन (चहलुम) का विशेष महत्व है। 8 और 9 जनवरी को हुई हिंसा में मारे गए लोगों की याद में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हालिया अशांति में सुरक्षाकर्मियों समेत 3,100 से अधिक लोगों की मौत हुई है। वहीं मानवाधिकार संगठन HRANA का दावा है कि मृतकों की संख्या 6,000 से ज्यादा हो सकती है। इन प्रदर्शनों की शुरुआत दिसंबर में महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी, लेकिन अब यह धार्मिक नेतृत्व और शासन व्यवस्था के खिलाफ व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है।
यह अशांति ऐसे समय में हो रही है जब ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत जारी है। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात किए जाने की खबरों से तनाव और बढ़ गया है। तेहरान ने इसे “उकसाने वाला कदम” बताया है। ईरान सरकार का आरोप है कि प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों, विशेषकर अमेरिका, द्वारा भड़काया जा रहा है। हालांकि कई विश्लेषकों का कहना है कि यह विरोध मुख्य रूप से आर्थिक संकट और राजनीतिक प्रतिबंधों से उपजे असंतोष का परिणाम है। ईरान के नेतृत्व के सामने एक ओर घरेलू अस्थिरता को नियंत्रित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने का दबाव। रविवार के लिए भी प्रदर्शनों की नई अपील की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि देश में फिलहाल तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे।