कोरोना 'एक' और 'दो' के बाद 'ब्लैक फंगस' और अब चूहों(प्लेग) आदि का हमला

Edited By Updated: 30 May, 2021 04:26 AM

corona one and two followed by black fungus and now mice plague attack

पिछले साल दुनिया में कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया था। अमरीका तथा यूरोप के बाद जल्दी ही इस महामारी ने सारी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और अब तक 35,39,785 लोग

पिछले साल दुनिया में कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया था। अमरीका तथा यूरोप के बाद जल्दी ही इस महामारी ने सारी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और अब तक 35,39,785 लोग मारे जा चुके हैं। अभी इस बीमारी पर काबू पाया भी नहीं जा सका था कि अब ‘ब्लैक फंगस’, ‘व्हाइट फंगस’ और ‘यैलो फंगस’ तथा अफ्रीकी देश ‘कांगो’ और आस्ट्रेलिया में चूहों से पैदा होने वाली महामारी ‘प्लेग’ ने दस्तक दे दी है। 

भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना से 3,22,512 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा भी न जाने कितनी मौतें हुई होंगी जो रिकार्ड में दर्ज नहीं हो पाईं। इलाज के लिए वैक्सीन ढूंढने में समय लग जाने से सटीक इलाज के अभाव में मौतें होती चली गईं। 

कोरोना के साथ-साथ देश में अब ‘ब्लैक फंगस’ के मामले बढ़ रहे हैं तथा भारत के कई राज्यों ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि कैंसर, डायबिटीज आदि से पीड़ित या ल बे समय तक स्टीरायड्स लेने वालों में ‘फंगल’ डिजीज होने के कारण रोगी गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। देश में कोरोना रोगियों के लिए मैडीकल ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण कोरोना पीड़ितों को उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन देने से भी फंगल इंफैक्शन बढऩे की बात सामने आई है। 

‘इंडियन कौंसिल आफ मैडीकल रिसर्च’ के अनुसार कोरोना से जान गंवाने वाले आधे मरीजों की मौत की वजह कोरोना से शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता कमजोर हो जाने से शरीर का अन्य बीमारी की चपेट में आ जाना है। 

कोरोना और तरह-तरह के फंगस के साथ-साथ अब एक और खतरनाक बीमारी दस्तक दे रही है। अफ्रीकी देश ‘कांगो’ में कोरोना से भी ज्यादा तेजी से जान लेने वाले ‘ब्यूबोनिक प्लेग’ के मामले सामने आए हैं। ‘प्लेग’ चूहों से फैलता है और फिर कीड़ों के जरिए मनुष्य इससे संक्रमित होता है। अभी तक इससे 11 लोगों की मौत हुई है। इसे ‘काली मौत’ या ‘ब्लैक डैथ’ भी कहा जाता है। अधिकांश मृतकों को पहले खून की उल्टी आई। आस्ट्रेलिया में भी चूहों के कारण बड़ा खतरा पैदा होता दिखाई दे रहा है। वहां के न्यू साऊथ वेल्स राज्य में लोग चूहों से परेशान हैं जिन्होंने न केवल कृषि भूमि बल्कि घरों पर भी धावा बोल दिया है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों की छतों और फर्श के कालीनों के नीचे तक से हजारों की सं या में चूहे झांक रहे हैं। उनके द्वारा बिजली के तारों व अन्य घरेलू सामान को कुतरने की आवाजों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। चूहों ने गांवों में विशाल भूभाग को खोद-खोद कर खोखला कर दिया है। एक किसान का कहना है कि वह ‘बोगनगेट शहर’ में अपने पारिवारिक फार्म पर सब्जियां बीज कर बहुत बड़ा जुआ खेल रहा है क्योंकि चूहों द्वारा उसकी सारी फसल कुतर जाने का भारी खतरा मौजूद है। 

न्यू साऊथ वेल्स के चोटी के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकोप से आस्ट्रेलिया को केवल सर्दियों की फसल नष्ट होने से कम से कम एक अरब आस्ट्रेलियन डालर का घाटा पड़ सकता है। उक्त घटनाक्रम तो विश्व में महामारियों से पैदा होने वाले खतरे की एक छोटी सी झलक मात्र है जबकि वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक डरावनी है क्योंकि वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल में इस समय तरह-तरह के असं य हानिकारक वायरस घूम रहे हैं। 

इस बीच न्यू साऊथ वेल्स के कृषि मंत्री ‘एडम मार्शल’ का कहना है कि यदि शीघ्र ही चूहों की संख्या पर काबू नहीं पाया गया तो न्यू साऊथ वेल्स को गंभीर आॢथक और सामाजिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। अत: चूहों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने के लिए इन्हें मारकर सही ढंग से ठिकाने लगाने की जरूरत है। इस समय हालांकि सरकार के प्रयासों व टीकाकरण आदि के कारण कोरोना महामारी के प्रकोप में कुछ कमी होती दिखाई दे रही है और ‘ब्लैक फंगस’ के भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की आशंका डाक्टरों ने खारिज कर दी है परंतु इस बीच नए खतरे के रूप में ‘प्लेग’ नजर आने लगा है। 

अभी तक तो यह कांगो तक सीमित है और आस्ट्रेलिया में चूहों की बढ़ती सं या के कारण इसकी आशंका पैदा हो रही है परंतु यदि हमारे कृषि प्रधान देश में यह आ गया तो जानमाल की भारी हानि हो सकती है। अत: समय रहते ही भारत सरकार को अभी से खबरदार होकर चूहों की आबादी पर रोक लगाने के उपाय शुरू कर देने चाहिएं।—विजय कुमार 

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