‘देश को घुन की तरह खा रहा भ्रष्टाचार’ सभी स्तरों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत!

Edited By Updated: 24 Dec, 2025 05:36 AM

corruption is eating away at the country like termites

सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद देश में ऊपर से नीचे तक चंद सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार का रोग बढ़ता ही जा रहा है। यहां तक कि अब तो चंद सरकारी कर्मचारियों ने रिश्वत लेने के लिए अपने ‘एजैंट’ भी रख लिए हैं। इसके मात्र 6 दिनों में सामने आए मामले...

सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद देश में ऊपर से नीचे तक चंद सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार का रोग बढ़ता ही जा रहा है। यहां तक कि अब तो चंद सरकारी कर्मचारियों ने रिश्वत लेने के लिए अपने ‘एजैंट’ भी रख लिए हैं। इसके मात्र 6 दिनों में सामने आए मामले निम्न में दर्ज हैं :

* 18 दिसम्बर को सतर्कता ब्यूरो के स्टाफ ने सर्कल बडाला तहसील दसूहा जिला ‘होशियारपुर’ (पंजाब) में तैनात ‘राम सिंह पटवारी’ को शिकायतकत्र्ता से 8,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 
* 20 दिसम्बर को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा उत्पादन विभाग में तैनात लैफ्टीनैंट कर्नल ‘दीपक कुमार शर्मा’ को ‘बेंगलुरू’ स्थित  एक कम्पनी से 3 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया तथा उसके परिसर की तलाशी के दौरान 2.23 करोड़ रुपए नकद जब्त किए।

* 21 दिसम्बर को ‘राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ की टीम ने ‘जोधपुर’ में पुलिस के एक ए.एस.आई. ‘प्रवीण कुमार’ को एक वाहन चोरी के केस में पकड़े गए आरोपी को रिमांड के दौरान ‘परेशान’ न करने और उसके केस में मदद करने के बदले में 3 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया जो गुरुग्राम में पालम विहार अपराध शाखा में तैनात था।
* 21 दिसम्बर को ही भ्रष्टïाचार निरोधक विभाग की टीम ने ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) पी.जी.आई. थाने के दारोगा ‘अमर प्रजापति’ को शिकायतकत्र्ता से 13,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 
*  22 दिसम्बर को ‘फरीदकोट’ (पंजाब) के सतर्कता विभाग ने पटवारी ‘पूजा यादव’ के अधीन कार्यरत एक निजी व्यक्ति ‘सुखविंदर सिंह’ को शिकायतकत्र्ता से 1500 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
 * और अब 23 दिसम्बर को भ्रष्टïाचार निरोधक विभाग के अधिकारियों ने ‘जयपुर’ (राजस्थान) में ‘मीरा कश्यप महिला प्रशिक्षण महाविद्यालय’  की डायरैक्टर ‘भंवर कंवर’ को शिकायतकत्र्ता से उसकी कालेज की अटैंडैंस पूरी करने के लिए 4500 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।

उक्त उदाहरणों से ही स्पष्टï है कि देश में भ्रष्टïाचार कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है। शायद इसका कारण भ्रष्टïाचारियों को सजा का भय न होना है जबकि चीन तथा घाना जैसे देशों में भ्रष्टाचारियों को फांसी जैसी कठोर सजाएं भी दी जाती हैं। 
इसी वर्ष 9 दिसम्बर को चीन में ‘सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट’ की स्वीकृति के बाद भ्रष्टाचार के आरोप में चीन की सरकारी वित्तीय कम्पनी ‘चाइना हुआरोंग होल्डिंग्स लिमिटेड’ के एक पूर्व जनरल मैनेजर ‘वाई लियानहुई’ को लगभग 157 मिलियन डॉलर रिश्वत लेने के आरोप में फांसी दे दी गई। इससे पूर्व इसी वर्ष चीन में 29 सितम्बर को ‘चांगचुन’ के मध्यस्थ ‘पीपुल्स कोर्ट’ ने ‘कृषि तथा ग्रामीण मामलों’ के पूर्व मंत्री ‘तांग रेनजियान’ को 38 मिलियन डालर रिश्वत लेने के आरोप में मृत्युदंड सुनाया था। इसके साथ ही अदालत ने उसे सभी राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने तथा उसकी सभी निजी सम्पत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया था। अदालत ने जब्त की गई सम्पत्तियों की बिक्री से प्राप्त होने वाला धन ‘राष्ट्रीय राहत कोष’ में जमा करवाने का आदेश दिया था।

यही नहीं, 1979 में पश्चिम अफ्रीकी देश ‘घाना’ के पूर्व राष्टï्रपति ‘एग्रेशियस’ को सरकारी कोष में हेराफेरी करने के आरोप में फांसी दी गई थी, जबकि एक अन्य सेनाधिकारी लैफ्टीनैंट जनरल ‘ई.के. उतुका’ को भी इन्हीं आरोपों में ‘एग्रेशियस’ के साथ ही फांसी दी गई थी।
इस तरह के हालात के बीच देश में सभी स्तरों पर भ्रष्टïाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि देश को घुन की तरह खा रही इस बीमारी पर रोक लग सके और दोषियों को नसीहत मिले। भ्रष्टाचार के मामले लंबे समय तक अदालतों में लटके रहने के कारण भी भ्रष्टाचारियों में कानून का भय नहीं रह गया है। अत: ऐसे मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में निपटा कर भ्रष्टाचारियों को तुरन्त सजा दिलानी चाहिए। —विजय कुमार 

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