Edited By ,Updated: 29 May, 2026 03:40 AM

बेशक केंद्र सरकार ने बालिकाओं के संरक्षण और उनके सशक्तिकरण के लिए 22 जनवरी, 2015 को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना आरंभ की थी परंतु अभी भी यह योजना अपने लक्ष्य से बहुत दूर है।
बेशक केंद्र सरकार ने बालिकाओं के संरक्षण और उनके सशक्तिकरण के लिए 22 जनवरी, 2015 को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना आरंभ की थी परंतु अभी भी यह योजना अपने लक्ष्य से बहुत दूर है। इसका प्रमाण है देश में रोज हो रही कन्याओं की हत्याएं। एक ओर गर्भ में पल रही बेटियों को जन्म से पहले ही मारा जा रहा है तो दूसरी तरफ सामाजिक रूढिय़ों और मजबूरियों के नाम पर माता-पिता और रिश्तेदार अपने ही हाथों से अपनी बेटियों की जान ले रहे हैं जिसकी पिछले 2 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 18 मार्च को ‘पलनाडू’ (आंध्र प्रदेश) जिले के ‘माचेरला’ शहर में अपनी बेटी के प्रेम विवाह से नाराज उसके पिता ‘चंद्र’ ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। 4 अप्रैल, 2026 को आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होने पर पुलिस ने ‘चंद्र’ को गिरफ्तार कर लिया।
* 23 मार्च को ‘जमशेदपुर’ (झारखंड) में ‘लक्ष्मी कुमारी’ नामक महिला ने अपनी नवजात बेटी की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसका शव घर के पिछवाड़े में दफना दिया। ‘लक्ष्मी कुमारी’ के पति ‘सोना राम’ की शिकायत पर पुलिस ने ‘लक्ष्मी कुमारी’ को गिरफ्तार कर लिया।
* 15 मई को ‘कानपुर’ (उत्तर प्रदेश) में एक व्यक्ति ने अपनी जुड़वां बेटियों की हत्या कर दी। पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि गरीबी और पैसों की भारी कमी के कारण बच्चियों का पालन-पोषण करने में असमर्थ होने के चलते उसने यह भयानक कदम उठाया और कहा कि ‘‘भगवान बेटियां दे तो उनके माता-पिता को पैसा जरूर दे।’’
* 20 मई को ‘कुशीनगर’ (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले ‘बिगन अंसारी’ ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी से किसी बात पर नाराज होने के कारण बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। ‘बिगन अंसारी’ ने उसके शव के कई टुकड़े कर दिए फिर उसने अपनी बेटी का सिर तालाब में फैंक देने के बाद उसके धड़ को एक बॉक्स में पैक कर ‘छपरा-गोमती नगर एक्सप्रैस’ ट्रेन में रख दिया।
‘लखनऊ’ के गोमती नगर स्टेशन पर सफाई कर्मियों ने ट्रेन की सीट के नीचे से खून बहता देख कर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद ‘बिगन अंसारी’ को गिरफ्तार कर लिया गया।
* 23 मई को ‘पटियाला’ (पंजाब) में ‘लवप्रीत कौर’ नामक एक कलियुगी महिला को अपनी 21 महीने की मासूम बेटी के बार-बार रोने से तंग आकर चाकू घोंप कर उसकी हत्या कर देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
* 24 मई को ‘दिल्ली’ के ‘भलस्वा डेयरी’ (मुकुंदपुर) इलाके में ‘दीपक’ नामक 25 वर्षीय युवक ने अपनी 10 महीने की बेटी का गला दबाकर उसे मार डाला और पुलिस में बच्ची के अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। परंतु पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने कबूल कर लिया कि बेटी के लिए दूध व दवाओं का खर्च पूरा करने में असमर्थ रहने के कारण उसने उसकी हत्या करके उसका शव सैप्टिक टैंक में फैंक दिया।
* 24 मई को ही ‘जालौन’ (उत्तर प्रदेश) में ‘विनीता’ नामक एक महिला ने अपने पति के साथ झगड़े के बाद अपने साथ सो रही 4 वर्षीय बेटी ‘नैना’ की गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी।
* और अब 25 मई को ‘करनाल’ (हरियाणा) में ‘सोनू’ नामक व्यक्ति को घरेलू विवाद के चलते अपनी 3 महीने की मासूम बेटी ‘दिव्यांशी’ की हत्या करने के बाद उसकी लाश को नाले में फैंक देने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
बेटियों की हत्या जैसा जघन्य पाप करने वाले यह क्यों नहीं सोचते कि जहां बेटा एक वंश को आगे चला कर एक परिवार का नाम रोशन करता है वहीं बेटियां अपने मायके और ससुराल अर्थात दो-दो परिवारों का नाम रोशन करती हैं। अत: बेटियों को इस प्रकार मारने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करना ही इस समस्या से मुक्ति का एकमात्र उपाय है। बेटियों की हत्या की प्रवृत्ति रोक कर उनके सही पालन-पोषण और उन्हें सही शिक्षा दिला कर ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का सरकार का नारा सफल हो सकता है।—विजय कुमार