Edited By ,Updated: 23 Sep, 2026 02:59 AM

विभिन्न अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों को जेलों में रखने का मकसद उनके आचरण में सुधार लाना होता है लेकिन मौजूदा समय में चंद जेलें ही ‘ङ्क्षहसा के अखाड़े’ बनती जा रही हैं। इनमें बंद कैदी ही नहीं, अब जेल अधिकारी और सुरक्षा कर्मचारी तक...
विभिन्न अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों को जेलों में रखने का मकसद उनके आचरण में सुधार लाना होता है लेकिन मौजूदा समय में चंद जेलें ही ‘ङ्क्षहसा के अखाड़े’ बनती जा रही हैं। इनमें बंद कैदी ही नहीं, अब जेल अधिकारी और सुरक्षा कर्मचारी तक सुरक्षित नजर नहीं आ रहे, जिनकी इसी वर्ष सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 3 जनवरी को ‘महोबा’ (उत्तर प्रदेश) उप-जेल में बंद एक कैदी ने कड़ाके की ठंड में दूसरे गैंगस्टर कैदी पर ठंडा पानी डाल दिया जिस पर दूसरे कैदी ने दांतों से उसका गाल काट कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और दूसरे कैदी के विरुद्ध गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करवाया गया।
* 20 जनवरी को ‘धौलपुर’ (राजस्थान) जेल में कैदियों के बीच हिंसक झड़प के बाद कुछ कैदियों ने जेल स्टाफ के साथ बदतमीजी की और खुद को बैरक में बंद कर लिया। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल को बुलाना पड़ा। इस मामले में कई कैदियों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।
* 12 फरवरी को ‘जयपुर’ (राजस्थान) की कड़ी सुरक्षा वाली सैंट्रल जेल में बंद कैदियों के बीच मारपीट में एक कैदी घायल हो गया जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
* 2 मई को ‘नैनी’ (उत्तर प्रदेश) स्थित जिला जेल में टी.वी. देखने को लेकर कैदियों में जमकर हुई मारपीट में कई कैदी घायल हो गए। बीच-बचाव करने पहुंचे जेल वार्डन को भी कैदियों ने पीट दिया। घटना में शामिल 5 आरोपी कैदियों को यहां से अन्य जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया।
* 24 मई को ‘कपूरथला’ (पंजाब) की मॉडर्न जेल में कैदियों के दो गुटों के बीच भीषण खूनी झड़प के बाद कैदियों ने पूरी जेल में उपद्रव मचा दिया। कैदियों ने बैरकों और जेल की दीवारों को नुकसान पहुंचाया, छतों पर चढ़कर लाठी-डंडे लहराए और जेल परिसर में बैरक के बाहर आग भी लगा दी। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े।
* 30 मई को ‘उदयपुर’ (राजस्थान) स्थित केंद्रीय जेल में एक कैदी को दूसरी जेल में ट्रांसफर से इंकार करने पर कैदी ने जेलर से मारपीट कर दी। कुछ दिन पहले भी इसी जेल में एक पुलिसकर्मी पर हमला किया गया था।
* 6 जुलाई को ‘मेरठ’ (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘चौधरी चरण सिंह जिला जेल’ में कैदियों के 2 गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। जेल के खेत में काम के दौरान एक कैदी ने दूसरे कैदी पर किसी नुकीली और धारदार वस्तु से जानलेवा हमला कर दिया जिससे कैदी की गर्दन की नस कट गई और अत्यधिक खून बहने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
* और अब 21 सितम्बर को ‘दिल्ली’ की ‘रोहिणी जेल’ में आम्र्स एक्ट और लूटपाट के मामलों में बंद 31 वर्षीय विचाराधीन कैदी ‘प्रदीप’ उर्फ ‘मोहिंदर’ की जेल परिसर के अंदर बेरहमी से हत्या कर दी गई। दोपहर के समय जब वह अपनी बैरक नंबर 203 की ओर लौट रहा था, तभी ‘भोला’ और ‘मुकेश’ नामक 2 अन्य कैदियों ने खिड़की की लोहे की ग्रिल तोड़कर बनाए नुकीले हथियार (सूए) से उसकी गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर दिए तथा अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। उपरोक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि आज चंद जेलें किस तरह ‘सुधार घर’ की बजाय ‘बिगाड़ घर’ का रूप धारण कर रही हैं, जिसके लिए कहीं न कहीं जेलों की सुरक्षा व्यवस्था में कमी भी जिम्मेदार है। इस प्रकार की घटनाओं के दृष्टिगत जहां जेलों में बंद उत्पाती कैदियों को ऐसी हरकतें करने से रोकने के लिए उन्हें कड़ा दंड देने की जरूरत है, वहीं जेलों की सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि जेलों को हिंसा के अखाड़े बनने से रोका जा सके।-विजय कुमार