‘डा. भीम राव आंबेडकर’ की प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ के बढ़ते मामले!

Edited By Updated: 05 Jun, 2025 05:50 AM

increasing cases of vandalism of statues of  dr bhim rao ambedkar

पिछले कुछ समय से असामाजिक तत्व देश के विभिन्न हिस्सों में संविधान निर्माता डाक्टर भीम राव आंबेडकर की प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ करके देश का माहौल खराब करने की साजिश रच रहे हैं। पिछले मात्र 3 महीनों के दौरान की गई इस प्रकार की घटनाएं निम्न में दर्ज...

पिछले कुछ समय से असामाजिक तत्व देश के विभिन्न हिस्सों में संविधान निर्माता डाक्टर भीम राव आंबेडकर की प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ करके देश का माहौल खराब करने की साजिश रच रहे हैं। पिछले मात्र 3 महीनों के दौरान की गई इस प्रकार की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 3 मार्च को ‘प्रयागराज’ (उत्तर प्रदेश) के ‘मांडा’ इलाके में डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को कुछ शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। 
* 6 मार्च को ‘मऊ’ (उत्तर प्रदेश) जिले के ‘मधुबन’ थाना क्षेत्र के ‘भेड़कुल’ गांव में रात के समय कुछ अराजक तत्वों द्वारा डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के विरुद्ध इलाके के लोगों ने भारी रोष व्यक्त किया तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

* 2 अप्रैल को ‘बटाला’ (पंजाब) में बाबा साहेब डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा के साथ तोड़-फोड़ की गई। 
* 13 अप्रैल को ‘आजमगढ़’ (उत्तर प्रदेश) के ‘तैय्यबपुर’ गांव में स्थित डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को अराजक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया जिस पर वहां बाबा साहेब की जयंती मनाने आए लोगों में भारी रोष फैल गया तथा बड़ी मुश्किल से पुलिस ने माहौल को शांत करवाया। 
* 16 अप्रैल को ‘हरदोई’ (उत्तर प्रदेश) में डा. भीम राव आंबेडकर और भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं को तोड़े जाने की घटना के बाद अत्यंत तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह घटना जातीय ङ्क्षहसा भड़काने की साजिश के अंतर्गत की गई है। 

*  20 अप्रैल को ‘सोनभद्र’ (उत्तर प्रदेश) के ‘कम्हरिया’ में शरारती तत्वों द्वारा बाबा साहेब डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ देने के परिणामस्वरूप गांव में तनाव का माहौल बन गया।
* 30 अप्रैल को ‘मैनपुरी’ (उत्तर प्रदेश) के गांव ‘चितायन नगरिया’ में डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को शरारती तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने के विरुद्ध क्षेत्र के लोगों ने भारी रोष व्यक्त किया।

* 3 मई को ‘सुल्तानपुर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘मोतीगरपुर’ में अराजक तत्वों ने डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा की उंगलियों तथा कंधे को क्षतिग्रस्त कर दिया। 
* 9 मई को ‘धार’ (मध्य प्रदेश) के गांव ‘जैतपुरा’ में असामाजिक तत्वों ने डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को दूसरी बार क्षतिग्रस्त किया तथा उसे उखाड़ कर ले जाने की कोशिश भी की।
* 26 मई को ‘संत कबीर नगर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘इमली डीहा’ गांव में कुछ उपद्रवी तत्वों ने डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा की एक उंगली को भंग कर दिया।  
* और अब 1 जून को ‘फिल्लौर’ (पंजाब) के गांव ‘नंगल’ में खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने अपने 2 गुर्गे भेज कर डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा के चेहरे पर काली स्याही स्प्रे करवा दी। यही नहीं, पन्नू ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर बाबा साहेब के प्रति अपशब्द भी कहे ताकि पंजाब का वातावरण खराब किया जा सके। 

इस तरह की घटनाओं को देख कर यह प्रश्न उठना लाजिमी ही है कि आखिर डा. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमाओं को खंडित करके किसी को क्या हासिल हो सकता है। डा. आंबेडकर जीवन भर न सिर्फ विशेष रूप से समाज के सर्वहारा वर्ग बल्कि सभी वर्गों के लोगों के हितों के लिए संघर्ष करते रहे। उनकी विद्वता के कारण ही उनकी अध्यक्षता में स्वतंत्र भारत की संविधान सभा का गठन किया गया था। प्रतिकूल हालात में कड़ा संघर्ष करके डा. आंबेडकर देश के कानून मंत्री के ऊंचे रुतबे तक पहुंचे। ऐसे महान व्यक्ति की प्रतिमाएं तोड़कर उनका निरादर करना कदापि उचित नहीं। अत: ऐसा करने वालों को तुरंत कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए ताकि इस बुराई पर लगाम लगे और समाज में सौहार्द बना रहे।-विजय कुमार

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