Edited By ,Updated: 16 Jun, 2026 04:39 AM

भारतीय जेलों में बंद कैदियों से मोबाइल फोन और नशों आदि की बरामदगी आज आम बात हो गई है, जिन्हें पहुंचाने में जेलों के कर्मचारियों की मिलीभगत पाई जा रही है। यह समस्या कितना गंभीर रूप धारण कर चुकी है, यह पिछले लगभग 3 महीनों की निम्न घटनाओं से स्पष्ट है :
भारतीय जेलों में बंद कैदियों से मोबाइल फोन और नशों आदि की बरामदगी आज आम बात हो गई है, जिन्हें पहुंचाने में जेलों के कर्मचारियों की मिलीभगत पाई जा रही है। यह समस्या कितना गंभीर रूप धारण कर चुकी है, यह पिछले लगभग 3 महीनों की निम्न घटनाओं से स्पष्ट है :
* 11 मार्च को ‘बेंगलुरु’ (कर्नाटक) स्थित सैंट्रल जेल के मुख्य द्वार पर रूटीन चैकिंग के दौरान ‘कर्नाटक राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल’ (के.एस.आई.एस.एफ.) ने जेल के वार्डर ‘प्रकाश गावड़े’ को जेल के अंदर बंद कैदियों को देने के लिए नशा ले जाते हुए पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके अंडर गार्मैंट्स में छिपाई हुई15 ग्राम ‘मेथमफेटामाइन’ (नशीला पदार्थ) और गांजा बरामद हुआ जो वह जेल में बंद हत्या के एक आरोपी को 10,000 रुपयों के बदलेे में देने जा रहा था।
* 6 अप्रैल को पंजाब की हाई सिक्योरिटी ‘बठिंडा’ (पंजाब) सैंट्रल जेल में तैनात लैब टैक्नीशियन ‘सागर सिंह’ को 68.25 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ा गया जिसे उसने अपनी कार में छिपा कर रखा हुआ था।
* 12 अप्रैल को ‘बठिंडा’ सैंट्रल जेल में तलाशी के दौरान गिरफ्तार किए गए ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ के सिपाही ‘राजिंदर सिंह’ के जेल के परिसर के अंदर ही स्थित कमरे से 23.99 ग्राम अफीम, 158 ग्राम जर्दा और सिरिंज बरामद की गईं जो उसने जेल में बंद कैदियों तक पहुंचानी थीं।
* 29 अप्रैल को ‘बठिंडा’ (पंजाब) सैंट्रल जेल में हैड कांस्टेबल ‘अंग्रेज सिंह’ को 34 ग्राम हैरोइन छिपाकर जेल के भीतर ले जाने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
* 25 मई को ‘मैसूर’ (कर्नाटक) सैंट्रल जेल के ‘अस्पताल वार्ड’ की सुरक्षा में तैनात एक गार्ड ‘एच.आर. रमेश’ को जेल के भीतर तंबाकू उत्पाद और अन्य प्रतिबंधित सामग्रियां छुपाकर ले जाते हुए गिरफ्तार किया गया।
* 2 जून को ‘क्योंझार’(ओडिशा) में एक जेल वार्डर को जेल में कैदियों के लिए गांजा पहुंचाते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
* 3 जून को ‘करनाल’ (हरियाणा) स्थित जिला जेल के अंदर नशीले पदार्थों की सप्लाई करने के आरोप में जेल के ही हैड वार्डर ‘सुनील कुमार’ को गिरफ्तार किया। एंटी नार्कोटिक्स सैल की जांच में सामने आया कि वह यह काम पैसों के लालच में करता था।
* 10 जून को ‘सिंहभूम’ (असम) स्थित जिला जेल के 2 सहायक जेलरों ‘रुद्र देवड़ी’ तथा ‘शुभाशीष घोष’ एवं 2 जेल वार्डरों ‘मसीद अली लस्कर’ तथा ‘विश्वजीत बरुआ’ को जेल के अंदर मोबाइल फोन तथा नशीले पदार्थ पहुंंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया।
* और अब 14 जून को ‘होशियारपुर’ (पंजाब) स्थित सैंट्रल जेल में हत्या के मामले में बंद कैदी ‘मनप्रीत मन्ना’ ने जेल के अंदर से वीडियो लाइव-स्ट्रीम करते हुए आरोप लगाया कि जेल स्टाफ कैदियों पर नशा बेचने और मंगवाने का दबाव बनाता है तथा इन्कार करने वालों का उत्पीडऩ किया जाता है।
‘मनप्रीत मन्ना’ ने जेल प्रशासन की एक महिला अधिकारी पर भी नशे से सम्बन्धित गतिविधियों में शामिल होने के लिए जेल में सजा काट रहे कैदियों पर दबाव डालने का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद से देश में जेलों के सुधार के लिए अनेक कमेटियां गठित की गईं परंतु लगभग सभी सुझाव ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने के कारण जेलों का हाल लगातार बुरा होता चला गया। अत: न सिर्फ जेलों में सुधार संबंधी सिफारिशों को तुरंत लागू करने की जरूरत है, बल्कि इसके साथ ही जेलों में नशे को पहुंचने से रोकने के लिए बेहतर सुरक्षा प्रबंधों, कैदियों पर नजर रखने के लिए सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने, मोबाइल आदि ले जाने और इनका इस्तेमाल रोकने के लिए तुरंत जैमर लगाने और जेलों में कैदियों को नशा एवं अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं पहुंचाने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को कठोर दंड देने की जरूरत है।—विजय कुमार