Edited By ,Updated: 20 Oct, 2026 03:54 AM

उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में 3 मई, 2023 को ‘मेइती’ समुदाय को एस.टी. का दर्जा दिए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध ‘कुकी’ समुदाय द्वारा समॢथत ‘आदिवासी छात्र संघ’ द्वारा निकाले गए ‘एकजुटता मार्च’ के बाद राज्य में भड़की ङ्क्षहसा अभी तक थमी नहीं है।...
उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में 3 मई, 2023 को ‘मेइती’ समुदाय को एस.टी. का दर्जा दिए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध ‘कुकी’ समुदाय द्वारा समर्थित ‘आदिवासी छात्र संघ’ द्वारा निकाले गए ‘एकजुटता मार्च’ के बाद राज्य में भड़की हिंसा अभी तक थमी नहीं है। मणिपुर में अशांति के मुख्य कारण ‘मेइती’ और ‘कुकी-जो’ समुदायों के बीच चल रहा गहरा जातीय संघर्ष, जमीन और संसाधनों को लेकर विवाद, तथा ‘मेइती’ समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग है।
राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों (जहां कुकी और नागा रहते हैं) तथा घाटी (जहां मेइती रहते हैं) के बीच जमीन के स्वामित्व, अफीम की खेती के विरुद्ध प्रशासन की कार्रवाई और बेदखली अभियानों से भी तनाव बढ़ा है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के प्रति सभी पक्षों में अविश्वास तथा हिंसक घटनाओं के बाद जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस संवेदनशील राज्य में शांति स्थापित नहीं होने दी। बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सुरक्षा बलों की तैनाती, इंटरनैट पाबंदियां और कई क्षेत्रों में ‘अशांत क्षेत्र’ (अफस्पा) का दायरा बढ़ाया जाता रहा है। राज्य में हिंसा पर नियंत्रण पाने में विफल रहने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ‘एन. बीरेन सिंह’ (भाजपा) द्वारा 9 फरवरी, 2025 को पद से त्यागपत्र देने के बाद 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति राज लगा कर राज्यपाल ‘अजय भल्ला’ को राज्य की कमान सौंपी गई और फिर 4 फरवरी, 2026 को ‘युमनाम खेमचंद सिंह’ (भाजपा) को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भी हिंसा जारी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ‘एन. बीरेन सिंह’ के अनुसार इस वर्ष हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि वैश्विक संघर्ष ट्रैकर्स के अनुसार जनवरी से अक्तूबर 2026 के बीच लगभग 100 लोग मारे गए हैं। यहां इसी महीने मणिपुर के विभिन्न समुदायों के बीच हुई ङ्क्षहसा की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 5 अक्तूबर को कुकी समुदाय के एक व्यक्ति का अपहरण करने के अगले ही दिन उसका शव बरामद होने से कुकी समुदाय में असंतोष भड़क उठा।
* 10 अक्तूबर को ‘मणिपुर’ के ‘कामजोंग’ और ‘उखरुल’ जिलों में सशस्त्र समूहों के बीच झड़पों में एक महिला सहित 5 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया कि हमलावर गोलीबारी करने के बाद म्यांमार सीमा की ओर भाग गए।
* 11 अक्तूबर को मणिपुर के 3 पहाड़ी जिलों ‘कामजोंग’, ‘उखरुल’ और ‘कांगपोकपी’ में ‘नागा’ और ‘कुकी’ समुदायों के बीच भड़की ङ्क्षहसा में एक महिला तथा ‘गोरखा’ समुदाय के एक किसान समेत 9 लोगों की मौत हो गई तथा 10 मकानों में आग भी लगा दी गई। इसे मणिपुर में इस वर्ष हुई सर्वाधिक ङ्क्षहसक घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
* 13 अक्तूबर को एक ‘नागा’ पुरुष का सिर कटा शव मिलने के बाद ‘नागा’ समुदाय में आक्रोष भड़क उठा।
* 16 अक्तूबर को ‘कामजोंग’ जिले के ‘कुकी’ बहुल ‘चासाद’ गांव में हमले में एक ‘कुकी’ महिला और उसके पति की हत्या कर दी गई।
* इसी दिन एक अन्य घटना में ‘कामजोंग’ जिले में दूसरे समुदाय के प्रतिद्वंद्वी हथियारबंद समूहों ने एक गांव पर हमला करके ‘तांगखुल नागा’ समुदाय के 3 लोगों को गोली मार कर घायल कर दिया।
* 17-18 अक्तूबर को ‘कामजोंग’ जिले में ‘नागा’ और ‘कुकी’ बस्तियों के 28 से अधिक मकानों को जला दिया गया। इसी दौरान ‘थौबल’ जिले के ‘खंगाबोक’ में 2 समुदायों के बीच भारी गोलीबारी और हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए।
* और अब 19 अक्तूबर को इम्फाल में एक जंगल में लकड़ी काट रहे 3 लोगों की हत्या कर दी गई जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया है। इतने लम्बे समय तक इस संवेदनशील राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच हिंसा का जारी रहना अत्यंत चिंताजनक है। इससे सिर्फ इस सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि पूरे देश की सुरक्षा पर आंच आने का खतरा है। अत: जितनी जल्दी इस समस्या का हल ढूंढ कर यहां शांति स्थापित की जाएगी उतना ही अच्छा होगा।—विजय कुमार