‘जेलों से फरार होते कैदी’ सुरक्षा में चूक या मिलीभगत!

Edited By Updated: 03 Oct, 2025 05:29 AM

prisoners escaping from jails  security lapse or collusion

घोर अव्यवस्था की शिकार भारतीय जेलों के अंदर हर तरह के अपराधों में बंद कैदियों द्वारा अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर या उनकी मिलीभगत से निकल भागने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो पिछले 3 महीनों में सामने आईं निम्न खबरों से स्पष्ट है :

घोर अव्यवस्था की शिकार भारतीय जेलों के अंदर हर तरह के अपराधों में बंद कैदियों द्वारा अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर या उनकी मिलीभगत से निकल भागने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो पिछले 3 महीनों में सामने आईं निम्न खबरों से स्पष्ट है :
* 26 मई, 2025 को ‘जयपुर’ (राजस्थान) की सैंट्रल जेल से 4 कैदियों रफीक’ उर्फ ‘बकरी’ (हत्या),‘भंवर लाल यादव (बलात्कार)‘अंकित बंसल’ और ‘करण गुप्ता’ (धोखाधड़ी) को फरार होने में सहायता करने के आरोप में 5 पुलिस कर्मियों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये चारों कैदी जेल के चिकित्सा अधिकारी, सेवादार तथा गार्ड की सहायता से भागे थे।

चारों कैदियों ने जेल के चिकित्सा अधिकारी और सेवादार की मदद से बीमारी का बहाना बनाकर ‘एस.एम.एस. अस्पताल’ रैफर होने की पर्ची हासिल की। योजना के अनुसार गार्डों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की बजाय शहर के अलग-अलग होटलों में पहुंचा दिया। वहां कोई अपनी गर्लफ्रैंड के साथ मस्ती करने लगा तो किसी को उसकी पत्नी प्रतिबंधित सामान और नकद राशि देने आई थी। एक कैदी की पत्नी मोबाइल लेकर पहुंची ताकि उसका पति जेल से ही लोगों को धमकियां देकर अवैध वसूली कर सके। 

* 27 मई, 2025 को ‘चम्बा’ (हिमाचल प्रदेश) के ‘राजपुरा’ स्थित जिला जेल में अपनी नाबालिग भतीजी को भगा ले जाने के आरोप में सजा काट रहा कैदी ‘इब्राहिम’ जेल के संतरी को चकमा देकर भाग निकला।
* 2 अगस्त को ‘कोरबा’ (छत्तीसगढ़) जेल में बलात्कार के आरोप में सजा काट रहे ‘सना सिंह’,‘राजा कंवर’,‘दशरथ’ तथा ‘चंद्रशेखर कुमार’ नामक 4 कैदी जेल की 25 फुट ऊंची दीवार फांद कर भाग निकले। बताया जाता है कि जेल में 15 मिनट के लिए बिजली चली गई थी जिसका इन कैदियों ने लाभ उठाया। 

* 9 अगस्त को ‘कानपुर’ (उत्तर प्रदेश) की हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या के आरोप में बंद ‘असीरुद्दीन’ नामक कैदी रहस्यमय रूप से गायब हो गया। जेल में दर्जनों सी.सी.टी.वी. कैमरे लगे होने के बावजूद पता नहीं लग पाया कि उसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया।
* 28 अगस्त को ‘अम्बाला’ (हरियाणा) सैंट्रल जेल से बाल संरक्षण कानून (पोक्सो) के अंतर्गत गंभीर धाराओं में बंद ‘अजय कुमार’ नामक एक विचाराधीन कैदी जेल से फरार हो गया। जेल के सुपरिंटैंडैंट के अनुसार घटना के दिन सुबह से ही जेल परिसर में बार-बार बिजली गुल हो रही थी तथा ‘अजय कुमार’ ने इसी का लाभ उठाया।
* और अब 26 सितम्बर को पंंजाब की ‘बङ्क्षठडा सैंट्रल जेल’ में चोरी के आरोप में बंद ‘तिलक राज’ नामक हवालाती फरार हो गया। 

इनके अलावा भी न जाने ऐसी कितनी घटनाएं हुई होंगी जो प्रकाश में नहीं आईं। हालांकि ऐसी प्रत्येक घटना के बाद प्रशासन द्वारा सुरक्षा प्रबंध पहले से अधिक मजबूत करने के दावे किए जाते हैं परंतु उन तथाकथित दावों का कोई असर दिखाई नहीं देता। जेलों में कैदियों तक मोबाइल फोन, नशा और नकद रुपए तक पहुंच रहे हैं जिससे वे जेलों के भीतर तरह-तरह की सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। जेलों में बैठे चंद कैदी तो जेलों से बाहर अपना धंधा तक चला रहे हैं और जेल के बाहर नशों की सप्लाई और हत्याएं तक करवा रहे हैं। यहां तक कि जेलों में बंद गैंगस्टरों के इंटरव्यू तक हो जाते हैं जैसे लारैंस बिश्रोई का इंटरव्यू एक निजी चैनल ने कर लिया। स्पष्टत: यह सब जेलों में कैदियों की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की चूक और लापरवाही का ही प्रमाण है जो अनेक प्रश्र खड़े करता है जिनका उत्तर तलाश कर उन कमजोरियों को दूर करने और इसके साथ ही ऐसे मामलों में शामिल जेल स्टाफ और अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।-विजय कुमार

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