अस्पतालों में ‘यौन उत्पीडऩ’ महिला रोगियों और नर्सों का

Edited By , Updated: 19 Jun, 2022 03:12 AM

sexual harassment of women patients and nurses in hospitals

देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की बाढ़ आई हुई है। यहां तक कि अस्पताल भी इससे मुक्त नहीं हैं और वहां इलाज करवाने के लिए आने वाली महिलाएं व काम करने वाली नर्सें भी चंद पुरुष डाक्टरों व स्टाफ

देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की बाढ़ आई हुई है। यहां तक कि अस्पताल भी इससे मुक्त नहीं हैं और वहां इलाज करवाने के लिए आने वाली महिलाएं व काम करने वाली नर्सें भी चंद पुरुष डाक्टरों व स्टाफ के अन्य सदस्यों के उत्पीडऩ का शिकार हो रही हैं जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 22 फरवरी, 2022 को देहरादून (उत्तराखंड) के झाझरा स्थित ‘गौतम बुद्ध चिकित्सा संस्थान महाविद्यालय’ में इलाज करवाने आई युवती से एक डाक्टर ने छेड़छाड़ तथा बलात्कार करने का प्रयास किया।
 * 20 मार्च को हाथरस (उत्तर प्रदेश) के जिला अस्पताल में नशे में धुत्त डाक्टर अरुण कुमार सिंह ने एमरजैंसी ड्यूटी पर तैनात नर्स से जबरदस्ती गले मिलने और अश्र्लील हरकत करने की कोशिश की तथा विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौच किया। 

* 07 मई को मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) में सरकारी मंडलीय अस्पताल के बाथरूम में एक सफाई कर्मचारी एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला के साथ बलात्कार करके फरार हो गया।
* 16 मई को बाड़मेर (राजस्थान) के सरकारी अस्पताल में पेट दर्द का इलाज करवाने आई एक 14 वर्षीय किशोरी को एक अस्पताल कर्मी ने डिलीवरी रूम में ले जाकर उसके साथ बलात्कार कर डाला। 
* 01 जून को रीवा (मध्य प्रदेश) के सुपर स्पैशलिटी अस्पताल की लिफ्ट में अस्पताल के एक कर्मचारी ने एक महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ की। 
* 14 जून को अजमेर (राजस्थान) के सबसे बड़े जे.एल.एन. अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती एक युवती को नशीला पदार्थ खिलाकर अस्पताल के एक कर्मचारी ने उससे बलात्कार कर डाला।
* 15 जून को दतिया (मध्य प्रदेश) में एक युवती को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में एक डाक्टर को पकड़ा गया। 

* और अब 15 जून को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरकारी हमीदिया अस्पताल में 50 नर्सों ने अस्पताल के सुपरिंटंैडैंट डा. दीपक मरावी पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। 

राज्य के स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि नर्सों ने डा. मरावी के विरुद्ध यौन शोषण तथा रात को ड्यूटी के समय उनके साथ अश्लील हरकतें करने और डराने-धमकाने, अपने चैंबर में बुला कर गंदे तरीके से छूने और छुट्टी देते समय उन्हें गंदी बातें कहने आदि के गंभीर आरोप लगाए हैं। नर्सों की ओर से दाखिल शिकायत में डा. दीपक मरावी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि रात में अर्धनग्न तथा नशे की हालत में वह दरवाजा खटखटाए बिना नर्सों के चेंजिंग रूम में घुस आता है। 

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि डा. मरावी ने हाल ही में अपने चैंबर में एक नर्स का बलात्कार करने की कोशिश भी की थी। जब नर्स ने इसका विरोध किया तो उसने कथित रूप से धमकी दी और कहा कि ‘‘मुझे कुछ नहीं होने वाला क्योंकि मुझे सी.एम. ने सुपरिंटैंडैंट बनाया है। मैं तुम्हारी नौकरी खा जाऊंगा और तुम्हें कहीं रहने लायक नहीं छोड़ूंगा।’’ कांग्रेस मीडिया विभाग की उपाध्यक्ष संगीता शर्मा ने इस संबंध में सुपरिंटैंडैंट डा. दीपक मरावी को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त को नोटिस जारी करके इस मामले में 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। 

अस्पतालों में महिलाओं के शारीरिक उत्पीडऩ के इस तरह के उदाहरण चिकित्सा जैसे पवित्र व्यवसाय में पनप रहे चरित्र के संकट का उदाहरण हैं और इस व्यवसाय में मौजूद ऐसे गलत तत्व चिकित्सा जगत की बदनामी का कारण बन रहे हैं। लिहाजा इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को दोषियों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई करके उन्हें कठोरतम सजा देनी चाहिए क्योंकि ऐसे लोगों को नौकरी में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।—विजय कुमार 

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