‘नक्सलवाद पर कसती नकेल’ जल्द-देश होने जा रहा इससे मुक्त!

Edited By Updated: 30 Nov, 2025 05:09 AM

tightening the noose on naxalism   soon the country is going to be free from i

‘पश्चिम बंगाल’ के छोटे से गांव ‘नक्सलबाड़ी’ से 1967 में चीनी तानाशाह ‘माओ’ से प्रभावित ‘चारू मजूमदार’ तथा ‘कनु सान्याल’ ने एक आंदोलन शुरू किया था। इसे ‘नक्सलवादी’ या ‘माओवादी’ आंदोलन नाम दिया गया था। आदिवासी बहुल क्षेत्रों के गरीब किसानों के उत्थान...

‘पश्चिम बंगाल’ के छोटे से गांव ‘नक्सलबाड़ी’ से 1967 में चीनी तानाशाह ‘माओ’ से प्रभावित ‘चारू मजूमदार’ तथा ‘कनु सान्याल’ ने एक आंदोलन शुरू किया था। इसे ‘नक्सलवादी’ या ‘माओवादी’ आंदोलन नाम दिया गया था। आदिवासी बहुल क्षेत्रों के गरीब किसानों के उत्थान के नाम पर शुरू किया गया यह आंदोलन कुछ ही वर्षों में पूरी तरह अपने रास्ते से भटक कर देश की एकता और अखंडता तक के लिए भारी खतरा बन गया। इसकी सर्वाधिक मार आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार झेल रहे थे।  वर्ष 1996 से 2025 के बीच ‘नक्सलवादी’ आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के सदस्यों सहित 13,734 से अधिक लोगों की हत्या कर चुके हैं। 

‘नक्सलवादी’ कंगारू अदालतें लगाकर मनमाने फैसले सुनाते थे और लोगों से जबरन वसूली, लूटपाट, बलात्कार तथा हत्याएं करने के अलावा अपने ही गिरोहों में शामिल महिलाओं का यौन शोषण भी कर रहे थे। 14 मई, 2017 को आत्मसमर्पण करने वाले 15 लाख के ईनामी ‘नक्सलवादी’ सरगना ‘कुंदन पाहन’ ने कहा था कि, ‘‘माओवादी नेता अब भ्रष्टï और औरतखोर हो गए हैं। रंगीन जिंदगी बिताते हैं और बलात्कार करते हैं।’’ 

‘नक्सलवादी’ आंदोलन से जुड़े ‘डा. संजय प्रमाणिक’ ने भी कहा था कि उसे 4-5 लड़कियों के साथ ‘ग्रुप सैक्स’ करना पसंद है। कई महिला ‘नक्सलवादियों’ का आरोप है कि पुरुष कामरेडों ने उनका यौन शोषण किया। बहरहाल, पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकार द्वारा नक्सलवादियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने के कारण इनकी गतिविधियों में काफी कमी आई है तथा 58 वर्षों के बाद भारत ‘नक्सलवाद’ से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार 31 मार्च, 2026 तक या उससे पहले देश को ‘नक्सलवाद’ मुक्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में तेजी व सरकार द्वारा नक्सलवादियों के आत्मसमर्पण के लिए नई नीति और पुनर्वास योजना की घोषणा के बाद नक्सली लगातार आत्मसमर्पण कर रहे हैं। 

* 26 नवम्बर, 2025 को 12 महिलाओं सहित 41 ‘नक्सलवादियों’ ने ‘बीजापुर’ (छत्तीसगढ़) में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें से 32 ‘नक्सलवादियों’ के विरुद्ध सरकार ने 1.19 करोड़ रुपए के ईनाम घोषित कर रखे थे। इन सब को नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के लिए 50-50 हजार रुपए दिए गए हैं। 

* 28 नवम्बर को ‘बस्तर’ (छत्तीसगढ़) जिले में कुख्यात नक्सली ‘चैतू’ उर्फ ‘श्याम दादा’  तथा  3 महिलाओं सहित 10 नक्सलवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का ईनाम घोषित था।
 * 28 नवम्बर को ही ओडिशा सरकार ने अपनी ‘माओवादी आत्मसमर्पण  और पुनर्वास नीति’ में संशोधन करके आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलवादियों को अब सवा करोड़ रुपए तक की आर्थिक सहायता देने के निर्णय के अलावा उनके द्वारा सरैंडर हथियारों के बदले में दी जाने वाली रकम भी बढ़ा दी है। 

* 28 नवम्बर को ही ‘गोंदिया’ (महाराष्ट्र) जिले में  25 लाख के ईनामी ‘अनंत’ सहित 11 नक्सलवादियों ने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। 
* और अब 29 नवम्बर को ‘छत्तीसगढ़’ के उपमुख्यमंत्री ‘विजय शर्मा’ ने दावा किया कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत ‘नक्सलवाद’ समाप्त हो गया है और बाकी भी तय समय में समाप्त कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जनवरी, 2024 से अब तक 800 से अधिक  ‘नक्सलवादी’ आत्मसमर्पण करके राष्टï्र की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। इसी अवधि के  दौरान एनकाऊंटरों में 202 ‘नक्सलवादी’ मारे गए और 1031 नक्सलवादियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारों का कहना है कि सुरक्षा बलों द्वारा किए जाने वाले प्रयास यदि कुछ और तेज कर दिए जाएं तो संभवत: नए साल (2026) के शुरुआती महीनों में नक्सलवाद से मुक्ति पाई जा सकती है।—विजय कुमार  

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