‘ईरान युद्ध पर देश में घिरे ट्रम्प’ सड़कों पर उतरे लोग, सियासी हमले शुरू!

Edited By Updated: 04 Apr, 2026 02:34 AM

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अमरीका और इसराईल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद इस युद्ध में अब तक 5,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 25,000 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। इस युद्ध के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कई स्थानों पर...

अमरीका और इसराईल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद इस युद्ध में अब तक 5,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 25,000 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। इस युद्ध के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कई स्थानों पर लोग अपनी जान बचाने के लिए भूमिगत बंकरों में पनाह लेकर बैठे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प युद्ध को लेकर रोज नई-नई बयानबाजी कर रहे हैं जिस कारण युद्ध के शांत होने की बजाय तनाव बढ़ता जा रहा है। इस युद्ध के कारण मध्य-पूर्व से दुनिया को होने वाली तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई तक रुक गई है जिससे अमरीका सहित दुनिया में तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं का संकट खड़ा हो गया है। इसी कारण अमरीका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध बढऩा शुरू हो गया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के विरोध में 29 मार्च को अमरीका में  बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। ‘नो किंग्स रैली’ के तहत 50 राज्यों में 3300 से अधिक स्थानों पर हुए इन प्रदर्शनों में करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ट्रम्प प्रशासन के ईरान के साथ बढ़ते तनाव और बढ़ती महंगाई के कारण उनसे नाराज हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करने की अपनी धमकियों को दोहराने के बाद 2 अप्रैल को अमरीका में हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों सहित 100 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने खुले पत्र पर उनके खिलाफ हस्ताक्षर किए हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि अमरीकी सेनाओं का आचरण और वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों के बयान ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन, जिसमें संभावित युद्ध अपराध भी शामिल हैं, के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं।’ इस दौरान कनैक्टिकट सीट से सीनेटर ‘क्रिस मर्फी’ ने भी अमरीकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो को निशाना बनाते हुए कहा है कि रूबियो ने अचानक यह कहना बंद कर दिया कि युद्ध का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता को ‘पूरी तरह नष्ट करना’ है। अब लक्ष्य सिर्फ इसे ‘कमजोर करना’ बताया जा रहा है। आखिर क्या मतलब है कि अमरीकी सैनिक अपनी जान दें और करदाताओं का अरबों डॉलर खर्च किया जाए, सिर्फ इसीलिए कि ईरान के पास फिर भी हजारों मिसाइलें बची रहें?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमरीकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रैंडी जॉर्ज को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बर्खास्त कर दिया है।  रैंडी  जॉर्ज के कार्यकाल में एक वर्ष से अधिक का समय शेष था। इसके साथ ही सेना के परिवर्तन और प्रशिक्षण कमान के प्रमुख जनरल डेविड होडने और सेना की चैपलिन कोर के प्रमुख मेजर जनरल विलियम ग्रीन को भी बर्खास्त कर दिया गया है। इस कदम से अमरीकी सेना और सत्ताधारी पार्टी के मध्य युद्ध को लेकर चल रहे मतभेद उजागर हुए हैं। बहरहाल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर ने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह युद्ध ब्रिटेन का नहीं है।

फ्रांस ने ईरान पर हमले करने के लिए अमरीका को अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जबकि इटली ने भी अमरीका को अपने एयर बेस देने से इंकार कर दिया है क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट आफ होर्मुज के बंद होने का असर यूरोप पर भी पड़ा है और ब्रिटेन इसे खुलवाने के लिए 40 देशों के साथ बातचीत कर रहा है। इस पूरे मामले में अमरीकी राष्ट्रपति अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद ईरान को तबाह करने के लिए रोजाना नई धमकियां दे रहे हैं। दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान और अमरीका दोनों देशों को सीज फायर के लिए प्रयास तेज करने चाहिएं और युद्ध को जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए, इसी में दुनिया के सभी देशों की भलाई है।—विजय कुमार

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