Edited By Tanuja,Updated: 04 Apr, 2026 11:12 AM

Hina Baloch के 80% वाले दावे ने बहस छेड़ दी है, लेकिन यह किसी डेटा पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। Pakistan में सामाजिक और धार्मिक दबाव के कारण LGBTQ+ पहचान अक्सर छिपी रहती है, जिससे ऐसी धारणाएं बनती हैं।
Peshawar: ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच (Hina Baloch) के वायरल वीडियो ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि “80% पाकिस्तान गे है और बाकी 20% बाइसेक्शुअल।” हालांकि उनका यह दावा किसी वैज्ञानिक शोध या आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित नहीं है, बल्कि उनके निजी अनुभव और समाज में देखी गई बातों पर आधारित है। असल में, दुनिया भर में LGBTQ+ आबादी का अनुमान आमतौर पर 3% से 10% के बीच माना जाता है। Pew Research Center और Gallup जैसी संस्थाओं ने कभी भी 80% जैसा कोई आंकड़ा नहीं दिया है। इसलिए यह दावा काफी बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया माना जा रहा है।
Pakistan में LGBTQ+ लोगों की पहचान अक्सर छिपी रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण सामाजिक और धार्मिक दबाव है। परिवार की इज्जत, समाज का डर और कानून का खतरा इन सब वजहों से लोग अपनी असली पहचान छिपाकर रखते हैं। कई लोग बाहर से खुद को “सीधा” दिखाते हैं, लेकिन निजी जिंदगी में अलग पहचान रखते हैं। इसी वजह से “open secret” जैसी बात सामने आती है। हिना बलोच ने यह भी बताया कि उनके लिए सबसे बड़ा डर अपनी gender expression को लेकर था जैसे मेकअप करना या महिला जैसे कपड़े पहनना,जिसके कारण उन्हें परिवार और समाज से हिंसा का डर रहता था।
पाकिस्तान में ख्वाजा सिरा (ट्रांसजेंडर) समुदाय को आज भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण कई लोगों को भीख मांगने, नाचने या सेक्स वर्क जैसे काम करने पड़ते हैं। ऐसे में हिना बलोच जैसे एक्टिविस्ट इस स्थिति को बदलने के लिए आवाज उठा रहे हैं। वहीं India में ट्रांसजेंडर कानूनों को लेकर भी विवाद है। 2026 के प्रस्तावित बिल का कई एक्टिविस्ट विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें gender identity के लिए सरकारी प्रमाण जरूरी बताया जाता है। उनका कहना है कि पहचान व्यक्ति का अधिकार है और इसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं होनी चाहिए। साथ ही, वे बेहतर शिक्षा, नौकरी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग भी कर रहे हैं।
कौन हैं हिना बलोच ?
- Hina Baloch एक पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट (social activist) हैं।
- वह LGBTQ+ और खासकर ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं।
- वह Pakistan के कराची से जुड़ी रही हैं और “ख्वाजा सिरा” (ट्रांसजेंडर) समुदाय की समस्याओं को सामने लाने के लिए जानी जाती हैं।
- हिना बलोच ने समाज में मौजूद भेदभाव, हिंसा और ट्रांस लोगों के लिए सीमित अवसरों के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू किया।
- उन्होंने Sindh Moorat March जैसे अभियानों में भाग लिया और Aurat March में भी सक्रिय रहीं, जहां उन्होंने gender equality और minority rights की मांग उठाई।
- हिना बलोच ने यह भी दावा किया है कि उन्हें अपने एक्टिविज्म की वजह से धमकियों, हिंसा और यहां तक कि किडनैपिंग का सामना करना पड़ा।
- बाद में वह United Kingdom चली गईं, जहां उन्होंने पढ़ाई (SOAS University of London) की और शरण (refugee status) के लिए आवेदन किया।