Edited By Sahil Kumar,Updated: 03 Mar, 2026 05:48 PM

बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच CNG कारें किफायती विकल्प मानी जाती हैं, लेकिन कई मालिकों ने शिकायत की है कि उनकी कार माइलेज कम दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, टायर प्रेशर कम होना, क्लच की खराबी, गंदा एयर फिल्टर और समय पर सर्विसिंग न होना इसकी...
नेशनल डेस्कः पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच बड़ी संख्या में लोग CNG कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि यह ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। हालांकि, कई वाहन मालिकों की शिकायत है कि उनकी CNG कार पहले जैसा माइलेज नहीं दे रही। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे अक्सर कुछ सामान्य लेकिन अहम कारण होते हैं, जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता है।
टायर प्रेशर पर दें खास ध्यान
वाहन विशेषज्ञों के अनुसार, टायरों में निर्धारित स्तर से कम हवा होना माइलेज घटने की प्रमुख वजहों में से एक है। जब टायरों में हवा कम होती है, तो इंजन को गाड़ी चलाने के लिए अधिक दबाव बनाना पड़ता है, जिससे CNG की खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा, घिसे हुए टायर या उनमें छोटे छेद भी हवा कम होने का कारण बन सकते हैं। ऐसे में नियमित रूप से टायर प्रेशर जांचना और जरूरत पड़ने पर टायर बदलवाना फायदेमंद साबित होता है।
क्लच की खराबी भी घटा सकती है माइलेज
क्लच वाहन की स्मूद ड्राइविंग में अहम भूमिका निभाता है। यदि क्लच प्लेट ढीली हो जाए या उसमें तकनीकी समस्या आ जाए, तो इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका सीधा असर ईंधन खपत पर पड़ता है। लगातार कम होता माइलेज क्लच से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए समय-समय पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
एयर फिल्टर की सफाई जरूरी
इंजन को बेहतर प्रदर्शन के लिए साफ हवा की जरूरत होती है। एयर फिल्टर में धूल और गंदगी जमा होने से हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे इंजन को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और ईंधन की खपत बढ़ती है। नियमित अंतराल पर एयर फिल्टर की सफाई या आवश्यकता होने पर उसे बदलवाना माइलेज बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।
नियमित सर्विसिंग
विशेषज्ञों का मानना है कि कई वाहन चालक तब तक सर्विसिंग नहीं कराते जब तक कोई बड़ी समस्या सामने न आए। यह लापरवाही धीरे-धीरे माइलेज पर असर डालती है। समय पर सर्विसिंग कराने से छोटी तकनीकी खामियां पहले ही पकड़ में आ जाती हैं और उन्हें ठीक किया जा सकता है। इससे वाहन की कार्यक्षमता और ईंधन दक्षता दोनों बेहतर रहती हैं।