चीन और रूस ने अपने ‘नो लिमिट’ गठजोड़ को और मजबूत किया

Edited By Updated: 02 Jan, 2026 04:55 AM

china and russia have further strengthened their no limits alliance

चीन और रूस अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं और आक्रामक कदम उठा रहे हैं, जिनके अमरीका के लिए गंभीर परिणाम हो रहे हैं। 9 दिसम्बर को, चीनी और रूसी बमवर्षक विमानों और अन्य विमानों ने जापान और दक्षिण कोरिया के निकट उड़ान भरी, जिससे अमरीका और जापान को लड़ाकू...

चीन और रूस अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं और आक्रामक कदम उठा रहे हैं, जिनके अमरीका के लिए गंभीर परिणाम हो रहे हैं। 9 दिसम्बर को, चीनी और रूसी बमवर्षक विमानों और अन्य विमानों ने जापान और दक्षिण कोरिया के निकट उड़ान भरी, जिससे अमरीका और जापान को लड़ाकू विमानों और बमवर्षक विमानों को तैनात करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह घटना चीन-रूस गठजोड़ के और अधिक मजबूत होने का नवीनतम उदाहरण है। बीजिंग और मॉस्को अमरीका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं और अमरीका और उसके सहयोगियों की कीमत पर अपनी शक्ति का विह्यस्तार करना चाहते हैं। शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ंने बार-बार कहा है कि उनकी सांझेदारी की कोई सीमा नहीं है और वे 40 से अधिक बार आमने-सामने मिल चुके हैं। फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से, चीन ने रूस को ‘उच्च प्राथमिकता वाली वस्तुओं’ का निर्यात बढ़ा दिया है, जिनमें 50 दोहरे उपयोग वाली वस्तुएं शामिल हैं, जैसे कम्प्यूटर चिप्स, मशीन टूल्स, राडार और सैंसर, जिनकी रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आवश्यकता है।

चीन के निर्यात ने रूस को 2023 से 2024 तक इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन 3 गुना बढ़ाने में मदद की, जिनका उपयोग रूस ने यूक्रेनी शहरों पर बमबारी करने के लिए किया है। 2024 में, रूस द्वारा आयात किए गए अमोनियम परक्लोरेट का 70 प्रतिशत हिस्सा चीन का था, जो बैलिस्टिक मिसाइल ईंधन का एक आवश्यक घटक है। चीन ने रूस को ड्रोन बॉडी, लिथियम बैटरी और फाइबर-ऑप्टिक केबल प्रदान किए हैं, जो यूक्रेन में इस्तेमाल किए जाने वाले फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं, जो इलैक्ट्रॉनिक जैमिंग को बाईपास कर सकते हैं। इस सहयोग से चीन को लाभ हो रहा है। रूस ने उन्नत प्रणोदन प्रणाली उपलब्ध कराकर चीन की अगली पीढ़ी की टाइप 096 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी के विकास में संभवत: सहायता की है।

लीक हुए दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि रूस ने ताइवान पर आक्रमण में इस्तेमाल किए जा सकने वाले उपकरण, जैसे हल्के उभयचर वाहन, स्वचालित एंटी-टैंक तोपें, हवाई बख्तरबंद कार्मिक वाहक और हवाई मार्ग से पैराशूट गिराने के लिए विशेष प्रयोजन वाली प्रणालियां चीन को बेचने पर सहमति जताई थी।
2017 और 2024 के बीच, उन्होंने एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व, आर्कटिक और अफ्रीका सहित एक विस्तृत क्षेत्र में लगभग 100 संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किए हैं। इन देशों ने कई प्रशिक्षण मिशन भी आयोजित किए हैं, जिनमें 2019 और 2024 के बीच 8 संयुक्त बमवर्षक उड़ानें शामिल हैं। जुलाई 2024 में, चीन और रूस ने अलास्का के तट पर संयुक्त गश्त के दौरान क्रमश: शीआन एच-6 और टू-95 बियर नामक लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों को उड़ाया। भविष्य में, रूस चीन को जमीन और अंतरिक्ष आधारित मिसाइल चेतावनी प्रणालियों के विकास में मदद कर सकता है, जिससे चीन की मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता बढ़ेगी और नई प्रणालियों के विकास में तेजी आएगी।

सैन्य क्षेत्र से परे, दोनों देशों ने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया है। चीन-रूस व्यापार 2022 में 190 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 245 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा, चीन तेल और गैस के लिए रूस पर निर्भर है, जो अब चीन के आयात का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है। दोनों देशों के बीच मतभेद भी हैं, जैसा कि अन्य सभी मित्र देशों के साथ भी है। चीनी नेताओं ने उत्तर कोरिया के साथ रूस के बढ़ते सैन्य संबंधों पर चिंता व्यक्त की है, जिससे प्योंगयांग की मिसाइल क्षमताओं में मजबूती आने की संभावना है। बीजिंग प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम में मदद करने से हिचकिचा रहा है। स्पष्ट है, चीन और मॉस्को राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक रूप से एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। उनका लक्ष्य अमरीका को सत्ता से बेदखल करना है।

सत्तावादी शासनों के इस गठबंधन का मुकाबला करने के लिए कोई योजना बनाने की बजाय, ट्रम्प प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति ने खतरे की गंभीरता को नजरअंदाज कर दिया। प्रशासन के अधिकारियों को यह समझना होगा कि तानाशाहों को खुश करने से उनका हौसला ही बढ़ेगा।-सेठ जी जोन्स

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