Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास के बीच नवरात्रि की शुरुआत, जानें कलश स्थापना से जुड़ी खास जानकारी

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 07:52 AM

chaitra navratri 2026

Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दिन से न केवल मां दुर्गा की आराधना का नौ दिवसीय पर्व शुरू होता है, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की...

Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दिन से न केवल मां दुर्गा की आराधना का नौ दिवसीय पर्व शुरू होता है, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब खरमास और पंचक दोनों का संयोग बन रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन परिस्थितियों में कलश स्थापना (घटस्थापना) करना शुभ होगा या नहीं।

शास्त्रों और ज्योतिष विद्वानों के अनुसार मां दुर्गा की पूजा, साधना और कलश स्थापना पर खरमास और पंचक का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि इस दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

Chaitra Navratri

कब से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का पर्व शुरू होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है।

साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं।

खरमास और पंचक कब लग रहे हैं?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस साल कुछ विशेष ग्रह स्थितियां भी बन रही हैं।
खरमास की शुरुआत: 15 मार्च 2026
खरमास समाप्त: 14 अप्रैल 2026

खरमास तब लगता है जब सूर्य देव मीन राशि में गोचर करते हैं। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता।

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वहीं पंचांग के अनुसार:
पंचक की शुरुआत: 16 मार्च 2026
पंचक समाप्त: 20 मार्च 2026

इस बार पंचक सोमवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए इसे राज पंचक कहा जाएगा।

क्या खरमास और पंचक में हो सकती है घटस्थापना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा, व्रत और साधना पर खरमास और पंचक का कोई दोष नहीं माना जाता। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से की जा सकती है।

हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन पालकी पर माना जा रहा है। यह संकेत समाज में कुछ अस्थिरता, भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए इस दौरान भक्तों को अधिक से अधिक पूजा, जप और साधना करने की सलाह दी जाती है।

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के लिए शुभ समय इस प्रकार रहेगा:
मुख्य शुभ मुहूर्त: सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

इन मुहूर्तों में श्रद्धा और विधि-विधान से कलश स्थापना करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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घटस्थापना के समय बरतें ये सावधानियां
कलश स्थापना हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर करें।
पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ करें।
कलश में गंगाजल, सुपारी, अक्षत और आम या अशोक के पत्ते रखें।
पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखें।
नवरात्रि के नौ दिनों तक नियम और सात्विकता का पालन करें।

नवरात्रि का धार्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह पर्व शक्ति, भक्ति और साधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

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