पंडित जवाहर लाल नेहरू की पांच बड़ी भूलें

Edited By Updated: 17 Dec, 2023 06:12 AM

five big mistakes of pandit jawahar lal nehru

भारत हमारी मातृभूमि है, देव भूमि है एवं पुण्य भूमि है। हम जानते हैं कि हमारे देश भारत का विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ था। पंडित जवाहर लाल नेहरू चाहते तो यह विभाजन रुक सकता था। जब देश के महान नेता धार्मिक, सामाजिक एवं क्रांतिकारी देश को स्वतंत्र...

भारत हमारी मातृभूमि है, देव भूमि है एवं पुण्य भूमि है। हम जानते हैं कि हमारे देश भारत का विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ था। पंडित जवाहर लाल नेहरू चाहते तो यह विभाजन रुक सकता था। जब देश के महान नेता धार्मिक, सामाजिक एवं क्रांतिकारी देश को स्वतंत्र करवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उसी समय मोहम्मद-अली जिन्ना एवं लार्ड माऊंटबैटन तथा कुछ मुसलमान नेता विभाजन का विचार कर रहे थे। इधर महात्मा गांधी जी ने घोषणा की थी कि भारत का विभाजन मेरी लाश पर होगा। 

1. पहली बड़ी भूल : पंडित नेहरू देश के विभाजन के लिए बड़े उतावले थे। उनका मानना था अब हम बूढ़े हो चुके हैं। जेल जाने की हिम्मत भी नहीं रही है। पंडित नेहरू जी के विचारों के सामने गांधी जी को झुकना पड़ा और देश का विभाजन हो गया। यह पंडित नेहरू जी की पहली भयंकर भूल थी। मोहम्मद अली जिन्ना तथा मुसलमान नेताओं के इशारे पर हिंदुओं तथा सिखों का कत्लेआम शुरू हो गया। माताओं तथा बहनों का सामूहिक बलात्कार, लूट-पाट आगजनी एवं कत्लेआम चरम सीमा पर पहुंच गया। लगभग 30 लाख हिंदू सिख मारे गए थे। इस विभाजन का विरोध आर्य समाज हिंदू महासभा, सनातन धर्म तथा राष्ट्रीय स्वयं-सेवक संघ ने किया पर पंडित नेहरू अपनी जिद पर अटल रहे। यह पंडित नेहरू जी की पहली बड़ी भूल थी।

2. दूसरी बड़ी भूल : हमारा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था और पाक ने 22 अक्तूबर 1947 को भारत पर आक्रमण करके हमारी 83000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया। उसमें लगभग 50 हजार हिंदू-सिख मारे गए थे। भारत की सेना जब आगे बढ़ रही थी तो देश के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने एक भयंकर भूल की तथा एक तरफा युद्ध विराम की घोषणा करके सेना के बढ़ते कदमों को रोक दिया और कश्मीर समस्या को यू.एन.ओ. में ले गए। जो भू-भाग पाकिस्तान के कब्जे में है उसे पाक अधिकृत कश्मीर (पी.ओ.के) कहते हैं जो अब तक पाकिस्तान के कब्जे में है। जहां पर उग्रवादी सरेआम प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं। 

3. तीसरी भूल धारा 370 कश्मीर में लागू करना : जब कश्मीर का पूर्ण विलय हो गया तब पंडित ने कश्मीर को शेख अब्दुल्ला को सौंप कर और उन्हीं के कहने पर धारा 370 संविधान में जोड़ कर कश्मीर को विशेष दर्जा दे दिया था। इस धारा के अनुसार कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने की अनुमति दे दी गई। भारत सरकार का कोई कानून वहां लागू नहीं हो सकता था। भारत का नागरिक कश्मीर का नागरिक नहीं हो सकता था। जम्मू-कश्मीर के लोगों को एक तरफ से दोहरी नागरिकता हासिल थी। यह लिखते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह धारा हटाई गई है और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया है। 

4. चौथी भूल नेपाल का भारत में विलय न करना : नेपाल पहले हिंदू राष्ट्र था। बाद में कम्युनिस्ट राष्ट्र बना। सन 1952 में नेपाल के राजा विक्रमशाह थे। नेपाल के राजा ने पंडित नेहरू जी से नेपाल को भारत में विलय की बात कही थी। उस समय पंडित नेहरू ने विलय के लिए इंकार कर दिया। 

5. पांचवीं बड़ी भूल : जब पंचशील समझौता (1954) हुआ तो पंडित जी ने तिब्बत को चीन का भाग करार दे दिया था। पंडित नेहरू जी की महान गलतियों में यह एक है। सन् 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो चीनी सेना इसी रास्ते से आक्रमण करने के लिए आई थी और हम हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे लगा रहे थे। हम जानते हैं कि चीन युद्ध (1962) में भारत हार गया था। इस हार के कारणों को जानने के लिए लै. जनरल हैडरसन और कमांडर ब्रिगेडियर भारत सरकार की अगुवाई में एक समिति का गठन किया गया था जिसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी को जिम्मेदार ठहराया गया था। आज भी चीन ने भारत की 14000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना कब्जा किया हुआ है जिसको चीन से छुड़ाना है। मैं समझता हूं कि मोदी जी और अमित शाह जी हैं तो सब मुमकिन है।-डा. बलदेव राज चावला

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