Edited By ,Updated: 04 Jun, 2026 05:12 AM

आजकल इंटरनैट ऐसे पोस्ट से भरा पड़ा है जो भारतीयों के एक वर्ग के उस उच्छृंखल और शोर-शराबे वाले व्यवहार को दिखाते हैं, जब वे विदेश जाते हैं और खुद को मूर्ख साबित करने के साथ-साथ देश की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाते हैं।
आजकल इंटरनैट ऐसे पोस्ट से भरा पड़ा है जो भारतीयों के एक वर्ग के उस उच्छृंखल और शोर-शराबे वाले व्यवहार को दिखाते हैं, जब वे विदेश जाते हैं और खुद को मूर्ख साबित करने के साथ-साथ देश की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाते हैं। विदेशों में अक्सर यात्रा करने वाले लगभग सभी लोगों का सामना भारतीयों के ऐसे समूहों से हुआ होगा, जो जरूरी नहीं कि केवल गुजरात से ही हों, जो दूसरों का थोड़ा भी लिहाज किए बिना सार्वजनिक रूप से हुड़दंग या बेहद अभद्र व्यवहार करते हैं। इस तरह के व्यवहार में हवाई अड्डों, होटल के रिसैप्शन एरिया या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अचानक जोर-जोर से गाना और नाचना शुरू कर देना, यात्रा के दौरान फोन पर जोर-जोर से बात करना और लाइनें तोडऩा शामिल है।
वायरल हो रहे वीडियो : इन दिनों इंटरनैट पर वायरल हो रहे वीडियो में से एक में गुजराती पर्यटकों के एक समूह को विदेश में किसी हवाई अड्डे पर उतरने के बाद विमान के ठीक बगल में टरमैक पर खुशी-खुशी गरबा नृत्य करते हुए दिखाया गया है। उन्हें स्पष्ट रूप से अन्य यात्रियों की निजता या भावनाओं की कोई परवाह नहीं थी, जिनमें शिशु और वृद्ध व बीमार लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो उनके इस हुड़दंग से परेशान हो रहे हों।
अक्सर ऐसी खबरें भी सामने आती हैं कि कैसे भारतीय पर्यटक होटल के कमरों में उतने पैसे दिए बिना, जितने लोगों के लिए भुगतान किया है, उससे अधिक लोगों को छिपाकर ले जाने या दोपहर के भोजन के इंतजाम के लिए मुफ्त नाश्ते से खाद्य पदार्थों को अपने बैग में ठूंसकर ‘ज्यादा समझदार’ बनने की कोशिश करते हैं। ये चीजें बिना ध्यान दिए नहीं रह जातीं। कोई आश्चर्य नहीं कि कई होटल भारतीयों से बुकिंग स्वीकार नहीं करते हैं या उन्होंने भारतीय पर्यटकों के लिए ‘क्या करें और क्या न करें’ के नोटिस लगा दिए हैं। कुछ साल पहले थाईलैंड से एक वीडियो सामने आया था जहां होटल के कर्मचारियों ने चैक-आऊट कर रहे भारतीयों के एक समूह को रोका था। उस टेप में दिखाया गया था कि उनके सामान में बाथरूम की फिटिंग्स, तौलिए, बैडशीट, पर्दे और यहां तक कि उनके कमरों से उखाड़ी गई ट्यूबलाइट्स भी थीं। इसके बाद परिवार के मुखिया को अपने बच्चों की मौजूदगी में यह गुहार लगाते देखा गया कि वे इन सभी चीजों के पैसे देने के लिए तैयार हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं।
बाहर यात्रा करने वाले अधिकांश लोग, विशेष रूप से पहली बार जाने वाले, यह महसूस नहीं करते हैं कि वे हाथ में भारतीय पासपोर्ट लेकर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे किसी न किसी तरह इस गलतफहमी में रहते हैं कि एक बार हवाई किराया या होटल का टैरिफ चुकाने के बाद वे पूरा मजा लेने के हकदार हैं। वे निश्चित रूप से इसके हकदार हैं, लेकिन दूसरों को परेशान या असुविधा में डालकर नहीं। वे इस कहावत का पालन करना भूल जाते हैं कि ‘जैसा देश वैसा भेष’ और अपने आस-पास के लोगों को देखकर सीखने की जहमत तक नहीं उठाते। जो बात और भी ज्यादा चौंकाने वाली है, वह यह है कि इंटरनैट पर लोगों का एक ऐसा वर्ग भी है जिसे इस तरह के हुड़दंग वाले व्यवहार में कुछ भी गलत नहीं लगता। वास्तव में वे ऐसे लोगों का समर्थन करते हुए दिखाई देते हैं। जाहिर है कि उनमें से अधिकांश लोग ‘कुएं के मेंढक’ हैं, जिन्हें शिष्टाचार या जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का कोई अनुभव नहीं है।
विदेशों में कोई कतारें नहीं तोड़ता : विदेश यात्राओं के दौरान ध्यान में आने वाले विपरीत व्यवहारों में से एक सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन है। विदेशों में कोई भी कतारें नहीं तोड़ता या ट्रेनों या अन्य सार्वजनिक वाहनों में चढऩे के लिए दूसरों को धक्का नहीं देता। पैदल चलने वालों को उचित सम्मान दिया जाता है और चिन्हित स्थानों (जेब्रा क्रॉसिंग) पर सड़क पार करने का अधिकार दिया जाता है। चालक ‘स्टॉप’ लिखे स्थानों पर पूरी तरह से रुक जाते हैं, भले ही कोई उन्हें न देख रहा हो।
जहां तक सार्वजनिक शिष्टाचार का सवाल है, जापानी इसमें सबसे आगे हैं। जो वीडियो बहुत लोकप्रिय हुआ था, वह जापानी फुटबॉल प्रशंसकों के बारे में था जो खेल के बाद अन्य दर्शकों द्वारा छोड़े गए कचरे को साफ करने के लिए रुके थे। कोई भी छोटे बच्चों को देख सकता है, जिनमें से कुछ तीन साल जितने छोटे भी होते हैं, जो उन कार चालकों के सामने झुककर आभार जताते हैं जो उन्हें सड़क पार करने देने के लिए रुके थे। जापानियों में सार्वजनिक अनुशासन उच्चतम स्तर का है।
अनुशासन की भावना पैदा करने में विफल रहीं सरकारें : दुर्भाग्य से भारत में क्रमिक सरकारें अपने नागरिकों में इस तरह का अनुशासन या सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करने में विफल रही हैं। शायद सरकार कम से कम इतना तो कर ही सकती है कि वह भारतीय पर्यटकों, विशेष रूप से पहली बार विदेश जाने वालों के लिए क्या करें और क्या न करें, की एक सूची जारी करे ताकि वे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार न करें और दूसरों को शॄमदगी से बचाएं। हवाई अड्डे पर गरबा नृत्य का वीडियो वायरल होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ में शामिल किए जाने के लिए यह शायद एक बेहद उपयुक्त विषय था।-विपिन पब्बी