Edited By Niyati Bhandari,Updated: 29 Jul, 2026 10:29 AM

Shravan 2026: श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा का विधान सबसे अलग क्यों है? जानें शिव वास की गणना का सटीक तरीका और क्यों सावन में बिना मुहूर्त के भी कर सकते हैं रुद्राभिषेक।
Shravan 2026: श्रावण मास केवल एक महीना नहीं, बल्कि महादेव और उनके भक्तों के मिलन का महापर्व है। मान्यताओं के अनुसार, जब देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार मास की निद्रा में चले जाते हैं, तब चराचर जगत के भरण-पोषण का उत्तरदायित्व स्वयं भूतभावन भगवान शिव संभालते हैं। यही कारण है कि इस पूरे माह महादेव पृथ्वी पर ही निवास करते हैं। सावन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जहां अन्य दिनों में शिव पूजन से पहले 'शिव वास' का विचार अनिवार्य होता है, वहीं सावन में महादेव हर पल अपने भक्तों के लिए उपलब्ध रहते हैं, जिससे यह पूरा महीना ही सिद्धियों का द्वार बन जाता है।
शिव वास जानने का तरीका
वर्तमान तिथि को 2 से गुणा करके पांच जोड़ें फिर 7 का भाग दें। शेष 1 रहे तो शिव वास कैलाश में, 2 से गौरी पाश्र्व में, 3 से वृषारूड़ श्रेष्ठ, 4 से सभा में सामान्य एवं 5 से ज्ञानबेला में श्रेष्ठ होता है। यदि शेष 6 रहे तो क्रीड़ा में तथा शून्य से श्मशान में अशुभ होता है। तिथि की गणना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से करनी चाहिए। शिवार्चन के लिए शुभ तिथियां शुक्ल पक्ष में 2, 5, 6, 7, 9, 12, 13, 14 और कृष्ण पक्ष में 1, 4, 5, 6, 8, 11, 12, 13, व 30 तिथियां शिवजी के पूजन के लिए श्रेष्ठ होती हैं।

मासिक शिवरात्रि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को भी होती है, जिसे प्रदोष व्रत कहते हैं और उसमें रुद्राभिषेक का विधान है, ऐसा हमारे पंचांग कहते हैं। वैसे त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है परंतु कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को कुछ विद्वान रुद्राभिषेक की सलाह नहीं देते। महाशिवरात्रि शिवजी के विशेष दिन के कारण क्षम्य है, साथ ही श्रावण मास में तिथि या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। अत: पूरे श्रावण भर रुद्राभिषेक कर सकते हैं। श्रावण में भगवान शिव की पूजा करने के लिए रुद्राभिषेक किया जाता है। रुद्र अर्थात भूत भावन शिव का अभिषेक।
