नए युग की पुलिसिंग : अपराध होने से पहले ही उसे रोकना

Edited By Updated: 12 Oct, 2026 04:30 AM

new age policing stopping crime before it happens

नब्बे के दशक में, एक ट्रेनी आई.पी.एस. अधिकारी के तौर पर जब मैं पहली बार किसी थाने में गया तो मुझे आज भी अच्छे से याद है कि वहां मुंशी हैड कांस्टेबल के हाथ से लिखा रोजनामचा (रजिस्टर), टेबल पर रखा काले रंग का भारी-भरकम डायल वाला लैंडलाइन फोन, जिसकी...

नब्बे के दशक में, एक ट्रेनी आई.पी.एस. अधिकारी के तौर पर जब मैं पहली बार किसी थाने में गया तो मुझे आज भी अच्छे से याद है कि वहां मुंशी हैड कांस्टेबल के हाथ से लिखा रोजनामचा (रजिस्टर), टेबल पर रखा काले रंग का भारी-भरकम डायल वाला लैंडलाइन फोन, जिसकी रिंगटोन अपनी मर्जी से सुनाई देती और फील्ड में जाने को तैयार कुछ बीट कांस्टेबल। तब पुलिस दक्षता इस बात से आंकी जाती थी कि पुलिस कितनी जल्दी मौके पर पहुंची और कितने लोगों को गिरफ्तार किया। पर बीते 3 दशकों में अंग्रेजों के जमाने की पुलिस के मॉडल का नजरिया पूरी तरह से बदल गया। सरकार ने अंग्रेजों की गुलामी के जमाने के सी.आर.पी.सी. 1861 जैसी अपराध की धाराओं को बदल 1 जुलाई, 2024 से भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.),भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.) और  भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बी.एस.ए.) जैसे 3 नए आपराधिक कानून लाकर देश की कानून व्यस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव किया।

साथ ही टैक्नोलॉजी आधारित नए दौर की पुलिस ने जन सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में खुफिया जानकारी, डाटा और सामुदायिक जरूरतों का लक्ष्य नए सिरे से तय किया कि अपराधियों पर कार्रवाई के अलावा पुलिस को अपराध घटित होने से पहले ही कैसे रोकने हैं। परंपरागत पुलिसिंग अब टैक्नोलॉजी आधारित अपराध निवारक की भूमिका की ओर तेजी से बढ़ रही है। हरियाणा में 112 डायल करके कोई भी व्यक्ति इस एक नंबर से ही पुलिस, अग्निशमन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सकता है। इस नंबर पर हर साल 50 लाख से ज्यादा आने वाली कॉल्स से पुलिस की शहरों और गांवों में पहुंच औसत 7 मिनट में संभव हुई है। रात के अंधेरे में जब कोई अकेली महिला खतरे के साए में अपने मोबाइल फोन पर दुर्गा शक्ति ऐप बटन दबाती है तो उसकी मौजूदा लोकेशन पुलिस के कमांड सैंटर को जाती है। यह घर से दूर एक कामकाजी महिला की सुरक्षा के लिए टैक्नोलॉजी आधारित एक अनूठी पहल है।

हैल्पलाइन 1930 पुलिस अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों के साथ जुड़ी है, जहां साइबर अपराध संबंधी हर दिन करीब 5000 कॉल आती हैं और बैंक खाते से पैसा निकलने से पहले संदिग्ध ट्रांसफर फ्रीज कर दिया जाता है। साइबर फ्रॉड के मामले रोकने में देश में अव्वल हरियाणा में करीब 40 फीसदी पैसा  साइबर फ्रॉड पीड़ितों को वापस दिलाया गया है। एक लाख रुपए से अधिक के साइबर फ्रॉड वाली किसी भी ऑनलाइन शिकायत पर अपने आप जीरो एफ.आई.आर. थाने के क्षेत्राधिकार की बाधा के बगैर देश के किसी भी इलाके में दर्ज हो रही है। हरियाणा पुलिस का ‘अभेद्य’ ऐप अब अज्ञात अंतर्राष्ट्रीय जबरन वसूली फोन कॉल को संबंधित लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोकता है। दोहरा ओ.टी.पी. नंबर, संदिग्ध यू.पी.आई. लेनदेन को ब्लॉक करता है, जिससे ‘डिजिटल अरैस्ट’ जैसे घोटाले पर अंकुश लगाया जा रहा है। ईगल ऐप से ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी हिरासत में लिए किसी व्यक्ति के चेहरे की तुरंत तुलना अपराधियों के डाटाबेस से कर फर्जी लोगों को पकड़ सकता है। 

राष्ट्रीय स्वचालित ङ्क्षफगरपिं्रट पहचान प्रणाली (एन.ए.एफ.आई.एस.) अपराध स्थल से मिले धुंधले फिंगरप्रिंट को कुछ ही सैकेंड में राष्ट्रीय रिकॉर्ड में मौजूद एंट्री से मिलान करते हैं। स्मार्ट ई-बीट जी.पी.एस. से पुलिस फोर्स की गश्त दर्ज होती है, क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नैटवर्क एंड सिस्टम (सी.सी.टी.एन.एस.) पुलिस थानों को अदालतों, जेलों और फॉरैंसिक सुविधाओं से जोड़ता है। ई-साक्ष्य सुनिश्चित करता है कि अपराध स्थल का सबूत बिना बदले असल हालत में अदालत तक सुरक्षित पहुंचे। यहां तक कि गुमनाम लोगों को भी अब नाम मिल रहा है। ए.आई. सहायक व्यवस्था अज्ञात शवों के चेहरे और फिंगरप्रिंट को लापता व्यक्तियों के डाटाबेस से मिलाती है, जिससे सालों से गुम अपनों का इंतजार कर रहे परिवारों को सुकून मिलता है। पुलिस के डिजिटल डैशबोर्ड दिखाते हैं कि कहां शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं, ताकि संबंधित पुलिस कर्मी की जवाबदेही तय हो।

दुर्घटना का डाटा ‘हीट मैप’ में बदल गया है, जो इंजीनियरों को दिखाता है कि कहां किसी सड़क के तीखे मोड़ को नए सिरे से डिजाइन करना है, ताकि दुर्घटना के समय ‘गोल्डन ऑवर’ घटाने में मदद मिले। मोटरवे पर नंबर-प्लेट पहचान कैमरे लगातार स्थिति पर नजर रखते हैं और भागने वाले वाहनों का ट्रैकिंग रिकॉर्ड भी बनाते हैं। ‘हरसमय’ नाम का  पोर्टल नागरिकों को एफ.आई.आर. की कॉपी या सत्यापन प्रमाणपत्र के लिए लंबी लाइन लगाने में लगने से बचाता है, थाने के काऊंटर पर क्यू.आर.-कोड फीडबैक हर नागरिक को अपनी राय सांझी करने का मौका देता है। पुलिस की कार्यशैली में बड़ा सुधार सर्वर रूम या किसी सॉफ्टवेयर से कहीं आगे पुलिस के मानवीय व्यवहार पर टिका है। तेजी से बदलती दुनिया में नए दौर की पुलिस का प्रदर्शन केवल इस बात से नहीं आंका जा सकता कि पुलिस ने टैक्नोलॉजी आधारित कितने ऐप लॉन्च किए, बल्कि पुलिस की दक्षता इस बात से आंकी जा रही है कि कितने अपराध होने से पहले ही रोक दिए गए।-अजय सिंघल(पुलिस महानिदेशक, हरियाणा)

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!