‘महिलाओं की गरिमा और युवाओं के चरित्र’ पर चोट करते अश्लील गीत!

Edited By Updated: 21 Mar, 2026 04:27 AM

obscene songs that strike at women s dignity and youth s character

फिल्मों की सफलता में गीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन फिल्मों  के निर्माता कई बार अपनी फिल्मों को सफल बनाने के लिए उनमें फूहड़ शब्दावली वाले लचर और अश्लील गीत भी शामिल कर देते हैं।

फिल्मों की सफलता में गीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन फिल्मों  के निर्माता कई बार अपनी फिल्मों को सफल बनाने के लिए उनमें फूहड़ शब्दावली वाले लचर और अश्लील गीत भी शामिल कर देते हैं। अभिनेता-अभिनेत्रियों की भद्दी अदाओं वाले गीतों का यह सिलसिला भारत में फिल्म युग की शुरूआत से ही चलता आ रहा है। वर्ष 1944 में प्रदॢशत फिल्म ‘मन की जीत’ में प्रसिद्ध शायर ‘जोश मलीहाबादी’ का लिखा गीत  ‘मेरे जोबना का देखो उभार’  शामिल किया गया था। वर्ष 1960 के दशक से इसमें कुछ तेजी आनी शुरू हुई जो आज भी जारी है जिसके चंद नमूने निम्न में दर्ज हैं :

* ‘इतनी जल्दी न करो, रात का दिल टूटेगा, आप जाएंगे तो जज्बात का दिल टूटेगा’ (1969, फिल्म ‘आदमी और इंसान’)।
* ‘जोबना से चुनरिया खिसक गई रे, दुनिया की नजरिया बहक गई रे’ (1973, फिल्म ‘धुंध’)।
* ‘जुम्मा चुम्मा दे दे, अरे ओ रे जुम्मा, मेरी जानेमन तू बोली थी, पिछले जुम्मा को चुम्मा दूंगी’ (1991, फिल्म ‘हम’।)
* ‘रुक्मणि-रुक्मणि, शादी के बाद क्या हुआ? खटिया पे धीरे-धीरे खट खट होने लगी, आगे पीछे हुआ तो छट पट होने लगी’ (1992, फिल्म ‘रोजा’)।
* ‘चोली के पीछे क्या है चुनरी के नीचे क्या है’ (1993, फिल्म ‘खलनायक’ में माधुरी दीक्षित पर फिल्माए इस गीत पर अश्लीलता के आरोप लगे।)
* ‘चढ़ गया ऊपर रे, अटरिया पे लोटन कबूतर रे, पंछी दीवाना चुग कर दाना, उड़ गया फर-फर के’ (1993, में ही प्रदॢशत ‘दलाल’ फिल्म में यह गीत मिथुन चक्रवर्ती व आयशा जुल्का पर फिल्माया गया था।) 

* ‘गुप चुप गुप चुप गुप छत पे सोया था बहनोई, मैं तने समझ के सो गई, मुझको राणा जी माफ करना, गलती म्हारे से हो गई’ (1995, फिल्म ‘करण- अर्जुन’ में यह गीत ममता कुलकर्णी पर फिल्माया गया था।)
* ‘खटिया पे मैं पड़ी थी और गहरी नींद बड़ी थी, एक खटमल था सयाना मुझपे था उसका निशाना चुनरी में घुस गया धीरे-धीरे’ (2008, ‘ऑस्कर अवार्ड’ विजेता फिल्म ‘स्लम डॉग मिलेनियर’ के इस गीत की काफी आलोचना हुई थी।)
* ‘आ रे प्रीतम प्यारे, सब आग तो मेरी कुर्ती में’ (2012, फिल्म ‘राऊडी राठौर’।)
* ‘सैक्सी-सैक्सी मुझे लोग बोलें’ (1994 ‘खुद्दार’ में करिश्मा और गोविंदा पर फिल्माया गीत इतना अश्लील माना गया कि इसके विरुद्ध प्रदर्शन तक हुए।)
* ‘सरकाई ल्यो खटिया जाड़ा लगे’ (1994, फिल्म ‘राजा बाबू’ में करिश्मा कपूर और गोविंदा पर फिल्माए गए इस गीत को भी अत्यंत अश्लील माना गया  और इस गीत पर भी विवाद पैदा हुआ।)
* ‘नाइट की नॉटी कहानी, ये हलकट जवानी, आंखों को क्यों सेके, हाथों से कर मनमानी’ (2012, फिल्म ‘हीरोइन’ में करीना कपूर पर फिल्माया गया।)
* ‘कुंडी मत खड़काओ राजा, सीधा अंदर आओ राजा, फूल बिछा परफ्यूम लगा के, मुझे बनाओ ताजा-ताजा’ (2015, फिल्म ‘गब्बर इज बैक’।)

इनके अलावा भी अश्लील और फूहड़ शब्दावली वाले गीतों की लम्बी सूची है जिनका वर्णन संभव नहीं। इन दिनों आने वाली फिल्म ‘केडी : द डेविल’ में अभिनेत्री ‘नोरा फतेही’ और ‘संजय दत्त’ पर फिल्माया गीत ‘सरके चुनरिया’ एवं हरियाणवी गीत ‘टटीरी’ के गायक बादशाह तथा निर्माताओं को क्रमश: 24 और 25 मार्च को पेश होने का ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ ने निर्देश दिया है। महिला आयोग ने उक्त दोनों गीतों को आपत्तिजनक बताते हुए स्पष्ट किया है कि महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध किसी भी प्रकार की सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। चूंकि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ अश्लील गीत युवाओं को चरित्रहीनता, अनैतिक आचरण और यौन अपराधों की ओर धकेलने का काम करते हैं, अत: ऐसे गीतों को कदापि उचित नहीं कहा जा सकता जिस पर सख्ती से रोक लगाने की तुरंत जरूरत है।—विजय कुमार 

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