यौन कुंठा से डिप्रैशन का शिकार हो रहे लोग!

Edited By Updated: 11 Oct, 2026 05:17 AM

people suffering from depression

हाल ही में पुरुषों और औरतों के यौन स्वास्थ्य को लेकर एक रिपोर्ट में सामने आया कि देश के अनेक पुरुषों और औरतों में यौन कुंठाग्रस्त होने के केसों में तेजी से इजाफा हो रहा है। यह एक टेबू (खुल कर बात न किए जाना वाला) विषय है। ऐसे विषय पर बात करने के लिए...

हाल ही में पुरुषों और औरतों के यौन स्वास्थ्य को लेकर एक रिपोर्ट में सामने आया कि देश के अनेक पुरुषों और औरतों में यौन कुंठाग्रस्त होने के केसों में तेजी से इजाफा हो रहा है। यह एक टेबू (खुल कर बात न किए जाना वाला) विषय है। ऐसे विषय पर बात करने के लिए थोड़ी बेबाकी की जरूरत होती है, क्योंकि इससे संबंधित पुरुष और औरत की सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी भी प्रभावित होती है। इस कारण भी आधुनिक समाज की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे मुद्दों पर खुल कर बात होनी चाहिए।

औरत हो या मर्द, यौन कुंठाग्रस्त होना एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जब व्यक्ति की यौन इच्छाएं और वास्तविकता के बीच असंतुलन होता है, यानी उसकी यौन जरूरतें या अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पातीं। यौन कुंठा वह अनुभव है, जब आपको वह यौन संतुष्टि नहीं मिलती, जिसकी आपको आवश्यकता या इच्छा होती है। चाहे कोई अविवाहित हो, किसी रिश्ते में हो, विवाहित हो, यौन संबंध कई लोगों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब यौन जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो इससे उत्पन्न निराशा आपके मूड, आपके रिश्तों और आपके समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। यहां तक कि यौन संबंध की कमी वास्तव में अवसाद यानी डिप्रैशन का कारण बन सकती है।

यौन कुंठा की शुरुआत अंतरंग जीवन में असंतोष से हो सकती है। माना जाता है कि यौन गतिविधि तनाव हार्मोन को कम करती है। यौन कुंठा से कुछ लोगों में अकेलेपन, निराशा और भावनात्मक अलगाव की भावना बढ़ जाती है। यौन कुंठा के बारे में सबसे आम गलत धारणाओं में से एक यह है कि यह मुख्य रूप से अविवाहित लोगों को प्रभावित करती है। वास्तव में, प्रतिबद्ध संबंधों में रहने वाले लोग भी इससे उतना ही जूझ सकते हैं।

रिश्तों में यौन कुंठा भावनात्मक जुड़ाव और आत्मसम्मान को भी कमजोर कर सकती है। इन चुनौतियों का सामना कर रहे जोड़ों के लिए प्रभावी संचार सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक है। कभी-कभी यौन कुंठा का कारण रिश्ते की गतिशीलता ही होती है। एक ऐसा साथी, जो यौन प्रदर्शन को लेकर अत्यधिक आलोचनात्मक हो, या जो कठोर और अवास्तविक अपेक्षाएं रखता हो, ऐसा माहौल बना सकता है जहां यौन संबंध जुड़ाव का स्रोत होने की बजाय एक परीक्षा जैसा लगने लगे। मनोविज्ञानी कहते हैं कि इस क्षेत्र में लगातार आलोचना मिलने से आत्म-संदेह, लाचारी और भावनात्मक अलगाव जैसी भावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो अवसाद का कारण बन सकती हैं।

यौन कुंठा तब भी उत्पन्न हो सकती है, जब सांझेदारों की जरूरतें, पसंद या इच्छा का स्तर अलग-अलग हो। जब इन अंतरों को स्वीकार नहीं किया जाता या उन पर चर्चा नहीं की जाती, तो शर्म और अपराधबोध विकसित हो सकता है तथा समय के साथ यह रिश्ते और व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य दोनों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसे ठीक तरीके से हैंडल करने की आवश्यकता है। गौरतलब हो कि यौन कुंठा एक अत्यंत संवेदनशील, अत्यंत भावनात्मक और एक न कहा जा सकने वाला शारीरिक और मानसिक विकार है। अगर आप किसी रिश्ते में हैं, तो अपनी जरूरतों के बारे में खुलकर बात करना बेहद जरूरी है।

यौन कुंठा से ग्रस्त डिप्रैशन का शिकार हो रहे, चाहे औरत हो यां पुरुष, दोनों को यह समझने का हक है कि क्या ठीक नहीं चल रहा और इस प्रक्रिया में उन्हें सुना जाना चाहिए। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण यह है कि जो पुरुष और औरत यौन कुंठा के बारे में खुलकर बात करते हैं, उनमें रिश्ते की संतुष्टि का स्तर ज्यादा होता है।-डा. वरिन्द्र भाटिया
 

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