Edited By ,Updated: 15 May, 2026 05:07 AM

श्री गुरु ग्रंथ साहिब और पावन गुटका साहिब की बेअदबी करने और सिख समाज की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की घटनाएं सामने आने के कारण, सिख संगत और सिख संस्थाओं द्वारा ऐसी कार्रवाइयां करने वालों को कड़ी सजा देने के लिए एक प्रभावशाली कानून बनाने की मांग लंबे...
श्री गुरु ग्रंथ साहिब और पावन गुटका साहिब की बेअदबी करने और सिख समाज की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की घटनाएं सामने आने के कारण, सिख संगत और सिख संस्थाओं द्वारा ऐसी कार्रवाइयां करने वालों को कड़ी सजा देने के लिए एक प्रभावशाली कानून बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस कारण 2016 में अकाली-भाजपा सरकार द्वारा और 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा पंजाब विधानसभा के माध्यम से 2 बार बिल पास किए गए लेकिन ये कानून का रूप अख्तियार न कर सके, जिस कारण सिख संगत बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए एक सख्त कानून न बनाए जाने के कारण नाराज थी।
इसी नाराजगी के कारण भाई गुरजीत सिंह खालसा नाम के एक सिख ने 400 फुट ऊंचे एक टावर पर चढ़कर मोर्चा लगा दिया और सरकार को अल्टीमेटम दे दिया कि जब तक पंजाब सरकार कानून नहीं बनाएगी, वह नीचे नहीं उतरेगा। सिख संगत ने गुरजीत सिंह खालसा का साथ दिया और यह नाराजगी एक बड़ा मोर्चा बन गई। बहुत सारी जत्थेबंदियों, जिनमें सर्व धर्म बेअदबी रोको मोर्चा, धर्म युद्ध मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर), भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद), बाबा बुड्ढा दल के निहंग सिंह, सिख सद्भावना दल और गुरमत टकसाल के अलावा कई नामवर व्यक्तियों ने निजी तौर पर इस मोर्चे को समर्थन दिया। इस मोर्चे को उस समय बल मिला, जब स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मोर्चे के नेताओं के साथ मुलाकात की और कानून जल्दी बनाने का भरोसा दिया। इस कानून की मांग के कारण पंजाब सरकार ने पहले जुलाई 2025 में एक बिल पास किया, जिसमें बेअदबी करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया था और पंजाब सरकार ने यह बिल विधानसभा की स्टैंडिंग कमेटी के हवाले कर दिया और इस बिल पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए 6 महीने का समय निश्चित कर दिया लेकिन स्टैंडिंग कमेटी द्वारा तय समय में रिपोर्ट नहीं दी जा सकी।
इस समय के दौरान सरकार पर कानून जल्दी बनाने और सजा सख्त करने का दबाव बढ़ गया, जिस कारण सरकार ने 2025 का बिल छोड़कर 2016 वाले कानून ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट’ में संशोधन करके कानून के माध्यम से कड़ी सजा का प्रावधान करने का फैसला किया। इस कानून में बेअदबी के मामलों में दोषियों को कम से कम 7 साल से लेकर उम्रकैद और 5 लाख से लेकर 25 लाख तक का जुर्माना किया जा सकता है। 13 अप्रैल, 2026 को यह बिल पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास कर दिया और राज्यपाल ने राजनीतिक दलों की आशंकाओं के विपरीत बिल को कानून बनाने की तुरंत मंजूरी दे दी।
भले ही बहुत बड़ी संख्या में सिख संगत और सिख जत्थेबंदियों ने इस कानून का स्वागत किया, लेकिन एस.जी.पी.सी. ने शुरुआत में स्वागत करने के बाद इस कानून के कई पहलुओं पर ऐतराज जताया है। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार साहिब ने भी इस कानून के बारे में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के माध्यम से पंजाब सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है कि 15 दिनों में इस कानून की आपत्तिजनक धाराओं में संशोधन किया जाए। जत्थेदार साहिब द्वारा दिए गए अल्टीमेटम ने एक तरफ पंजाब सरकार को गहरी ङ्क्षचता में डाल दिया है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब निवासियों, खासकर सिख संगत को भी एक दुविधा के रास्ते पर खड़ा कर दिया है। जत्थेदार द्वारा दिए गए अल्टीमेटम पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की प्रतिक्रिया से यह झलक मिल रही है कि इस मसले पर अकाल तख्त और पंजाब सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनना स्वाभाविक है।
जत्थेदार द्वारा सरकार को कस्टोडियन की परिभाषा, जिसके बारे में अभी तक यह समझा जा रहा है कि इसमें वे सभी व्यक्ति शामिल होंगे, चाहे वे गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य हों या फिर गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी हों अथवा संगत, जो अपने घरों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करते हैं और गुटका साहिब रखते हैं, वे सब किसी असुखद घटना के कारण दोषियों की गिनती में आ सकते हैं। इस कारण जत्थेदार ने कस्टोडियन की परिभाषा को बदलने की मांग के साथ-साथ गुरु ग्रंथ साहिब को ‘बीड़’ की जगह ‘स्वरूप’ शब्द के साथ संबोधित करने पर भी ऐतराज जताया है। इसलिए सरकार को यह प्रस्ताव दिया गया है कि सरकार इस मसले पर विचार-विमर्श करे, इसके लिए सिख विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों की टीम शिरोमणि कमेटी द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार जत्थेदार साहिब द्वारा दिए गए 15 दिन के अल्टीमेटम के समय में यह सब कुछ कर भी सकती है या नहीं? यदि वास्तविकता में देखा जाए तो सरकार यदि करना भी चाहे तो इतनी जल्दी यह कार्रवाई करना संभव नहीं है। दूसरा, मुख्यमंत्री पहले ही कह रहे हैं कि कानून सिख संगत की मर्जी से बनाया गया है और मुख्यमंत्री ने शुक्राना यात्रा भी पूरी कर ली है। इस तरह दोनों पक्षों पर गौर से नजर डालें तो कानून की खूबियों या कमियों से ज्यादा राजनीतिक मकसद भारी लग रहे हैं, जो न तो पंजाब के हित में हैं और न ही सिख संगत के। इसलिए दोनों पक्षों को धैर्य से काम लेना चाहिए। सरकार को सिख संगत, शिरोमणि कमेटी और जत्थेदार साहिब द्वारा लगाए गए ऐतराजों पर विचार करने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए और सिख संस्थाओं को भी इस कार्रवाई के लिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। इस कानून पर विवाद होना पंजाब और सिख संगत के हित में नहीं होगा, इसलिए इसका सार्थक हल निकालने के लिए सरकार और सिख संस्थाओं को सांझी जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है।-इकबाल सिंह चन्नी