Edited By ,Updated: 13 Mar, 2026 05:38 AM

पंजाब में जन्म लेने वालों के लिए रोज नई मुहिम वाली कहावत हमारी समृद्ध विरासत और अनुभवों से जन्मी है। स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान और आजादी की प्राप्ति के बाद लोगों को दरपेश मुश्किलों के हल के लिए लड़े गए गौरवशाली संघर्ष इस तथ्य की गवाही देते...
पंजाब में जन्म लेने वालों के लिए रोज नई मुहिम वाली कहावत हमारी समृद्ध विरासत और अनुभवों से जन्मी है। स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान और आजादी की प्राप्ति के बाद लोगों को दरपेश मुश्किलों के हल के लिए लड़े गए गौरवशाली संघर्ष इस तथ्य की गवाही देते हैं। परंतु आज पंजाब चारों तरफ से गंभीर संकट से घिरा हुआ है। पंजाब की जिस जवानी पर सारा देश कभी गर्व किया करता था, वही आज बेरोजगारी के कारण गैंगस्टरवाद, नशाखोरी आदि अराजक प्रवृत्तियों का शिकार बनी हुई है।
पांच नदियों की धरती, पानी के ‘महा अकाल’ जैसे हालातों की दहलीज पर आ खड़ी हुई है। हरित क्रांति की बदौलत शिखर पर पहुंची कृषि पैदावार अब ठहराव में है या गिरावट की ओर जा रही है। रासायनिक खादों, कीटनाशकों, संशोधित बीजों आदि के दुरुपयोग से धरती बंजर बनती जा रही है। खनन और रेत माफिया ने पंजाब के पर्यावरण को तबाह कर दिया है।
इन अप्रिय हालातों को पैदा होने से रोका जा सकता था या समस्या से अब भी सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है लेकिन शर्त यह है कि प्रांत का राजनीतिक नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जो सिख गुरु साहिबान द्वारा रचित मानवीय बाणी, भक्ति लहर के महान रहबरों की तर्कवादी शिक्षाओं, गदरी शूरवीरों और शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों की इंकलाबी विचारधारा के प्रति समॢपत हों। जो निजी स्वार्थ की बजाय सामाजिक हितों को प्राथमिकता देते हों। अफसोस, हमारा गौरवशाली पंजाब ऐसे नेतृत्व से स्पष्ट रूप से वंचित दिख रहा है!
अंधविश्वास और स्वार्थ फैला रहे डेरों की भरमार है। अधिकांश अकाली धड़े धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, संघीय ढांचे की रक्षा के कर्तव्य और सबसे बढ़कर मनुष्य द्वारा मनुष्य की लूट के खात्मे के सुनहरे सिद्धांत को त्याग कर देश की सत्ताधारी पार्टी, भाजपा के साथ राजनीतिक सांठगांठ करना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी, जिसकी आजादी के आंदोलन में मुख्य भूमिका रही, भाजपा विरोधी दलों में आज भी बड़े जनाधार वाली पार्टी है लेकिन आपसी फूट में बुरी तरह फंसी हुई है।
भाजपा केंद्रीय सत्ता पर काबिज होने का लाभ उठाकर ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की नीति के सहारे पंजाब की सत्ता पर काबिज होने का प्रयास कर रही है। यह कई प्रकार के लालच और प्रलोभन देकर दलित समाज में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। धार्मिक डेरों और सरकारी एजैंसियों के उपयोग तथा दूसरे दलों से सिद्धांतहीन स्वार्थी तत्वों को भाजपा में शामिल करके भाजपा नेता पंजाब की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बनने की आस लगाए बैठे हैं।
‘विकल्प’ प्रदान करने के नाम पर सत्ता में आई भगवंत मान की ‘आप’ सरकार के प्रति लोगों का मोहभंग हो रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा वोट हासिल करने के लिए लोगों को 200 ग्राम हल्दी और एक नमक की थैली मुफ्त देने जैसे घटिया हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने तथा भ्रष्टाचार का खात्मा करके सुशासन देने वाली ‘कट्टर ईमानदार’ पार्टी होने के दावे अब लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रहे। ‘नशों के विरुद्ध समयबद्ध युद्ध’ छेडऩे के बाद, नशे के अत्यधिक उपयोग से होने वाली मौतों और नशा तस्करों के कारोबार में भारी वृद्धि हुई है।
सरकार और प्रशासनिक मशीनरी की ‘बुलडोजर’ कार्रवाइयों और झूठी पुलिस मुठभेड़ों से हालात ‘जंगल राज’ जैसे बन गए हैं। गैंगस्टरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। वे समय और स्थान की अग्रिम घोषणा करके किसी को सरेआम गोलियां मार देते हैं। भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि शायद ही कोई मंत्री, विधायक या ‘आप’ नेता ऐसा हो, जिसने ‘आप’ के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी न लगाई हो। इन लोगों की संपत्तियों और बैंक खातों में पिछले 4 वर्षों में हुई वृद्धि की निष्पक्ष जांच किए जाने से ‘कट्टर ईमानदार’ पार्टी के सारे भेद खुल सकते हैं! पंजाब के भीतर वामपंथी, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक शक्तियों की आज भी भारी मौजूदगी है। इन्हें एकजुट करके एक जनपक्षीय राजनीतिक विकल्प खड़ा किया जा सकता है। इस राजनीतिक विकल्प का मूल आधार पंजाब की देशभक्ति और पीड़ित लोगों के लिए आत्म-बलिदान की परंपराएं, सिख गुरु साहिबान के मानवीय दर्शन का मार्गदर्शन, भक्ति आंदोलन के महापुरुषों की प्रबुद्ध शिक्षाएं और सभी बाधाओं, साजिशों व विभिन्न रंगों के सांप्रदायिक तत्वों का राजनीतिक-वैचारिक मोर्चे पर मुकाबला करने की क्षमता होगा।-मंगत राम पासला