Consumer Court Order: बिना अनुमति खाते से निकले ₹1.30 लाख, SBI को लौटाने होंगे पैसे

Edited By Updated: 14 Aug, 2026 06:08 PM

1 30 lakh withdrawn from account without permission

अगर आपके बैंक खाते से बिना आपकी अनुमति पैसे निकल जाएं, तो बैंक की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Delhi State Consumer Commission) ने ऐसे ही एक मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को ग्राहक के ₹1.30...

नई दिल्लीः अगर आपके बैंक खाते से बिना आपकी अनुमति पैसे निकल जाएं, तो बैंक की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Delhi State Consumer Commission) ने ऐसे ही एक मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को ग्राहक के ₹1.30 लाख लौटाने का आदेश बरकरार रखा है। आयोग ने माना कि बैंक अनधिकृत लेनदेन को लेकर पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका।

खाते से निकले थे ₹1.30 लाख

मामला अक्टूबर 2018 का है। एक सरकारी स्कूल में लैब असिस्टेंट के रूप में काम करने वाले ग्राहक के SBI खाते में सैलरी आने के बाद करीब ₹1.30 लाख की रकम थी। 

बाद में जब उन्होंने ATM से पैसे निकालने की कोशिश की, तो खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने के कारण ट्रांजेक्शन फेल हो गया। इसके बाद पासबुक अपडेट कराने पर उन्हें पता चला कि खाते से ₹80,000 ATM के जरिए और ₹50,000 ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए निकाले जा चुके थे।

रिकॉर्ड के मुताबिक, ATM से ₹20,000 की चार अलग-अलग निकासी हुई थीं। उसी दिन ₹40,000 और ₹10,000 की दो रकम एक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर की गईं।

ग्राहक ने तुरंत की शिकायत

ग्राहक ने मामले की जानकारी मिलने के बाद बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई और पुलिस में भी शिकायत की। उनका कहना था कि उन्होंने न तो ये ATM निकासी कीं और न ही किसी दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक को अधिकृत किया। मामला बाद में उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां ग्राहक ने बैंक पर सेवा में कमी का आरोप लगाया।

SBI नहीं पेश कर सका अहम सबूत

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बैंक के पास ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते थे, जिनसे यह पता लगाया जा सकता था कि विवादित ट्रांजेक्शन कैसे हुए लेकिन SBI संबंधित ATM CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के जरिए यह साबित नहीं कर सका कि लेनदेन ग्राहक ने ही अधिकृत किए थे।

आयोग ने यह भी देखा कि ग्राहक ने अपना डेबिट कार्ड खोने या किसी दूसरे व्यक्ति को देने की बात से इनकार किया था। ऐसे में बैंक को यह स्पष्ट करना था कि अनधिकृत निकासी और ट्रांसफर किस तरह हुए।

SBI की अपील खारिज

जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के खिलाफ SBI ने अपील की थी। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

ग्राहक को कितना पैसा मिलेगा?

आयोग के आदेश के मुताबिक SBI को ग्राहक को ₹1.30 लाख की मूल रकम पर 12 अक्टूबर 2018 से 6% सालाना ब्याज देना होगा। इसके अलावा ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹5,000 और कानूनी खर्च के लिए ₹5,000 भी देने का निर्देश दिया गया है।

  

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