गेहूं के आटे के निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, 5 लाख टन आटे के Exports को दी मंजूरी, 2022 में लगाया था बैन

Edited By Updated: 19 Jan, 2026 06:46 PM

after 4 years government makes a major decision wheat flour

सरकार ने करीब तीन साल बाद गेहूं के आटे और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर आंशिक राहत दी है। केंद्र सरकार ने कुल 5 लाख टन गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में गेहूं के निर्यात पर 2022 से...

बिजनेस डेस्कः सरकार ने करीब चार साल बाद गेहूं के आटे और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर आंशिक राहत दी है। केंद्र सरकार ने कुल 5 लाख टन गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में गेहूं के निर्यात पर 2022 से प्रतिबंध लागू है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 16 जनवरी को जारी अधिसूचना में साफ किया कि गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात फिलहाल प्रतिबंधित ही रहेगा लेकिन तय शर्तों के तहत 5 लाख टन तक निर्यात की विशेष अनुमति दी जा रही है।

आवेदन की प्रक्रिया और समयसीमा

डीजीएफटी के मुताबिक, पहले चरण में निर्यात के लिए आवेदन 21 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 के बीच स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद जब तक निर्धारित कोटा उपलब्ध रहेगा, हर महीने के आखिरी 10 दिनों में आवेदन मंगाए जाएंगे। निर्यात की मात्रा का अंतिम फैसला एक विशेष एक्जिम सुविधा समिति करेगी।

6 महीने तक मान्य होगी अनुमति

निर्यात की यह अनुमति जारी होने की तारीख से 6 महीने तक वैध रहेगी। इसके लिए आटा मिल, प्रोसेसिंग यूनिट और व्यापारी निर्यातक आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास वैध IEC और FSSAI लाइसेंस हो। इसके अलावा, निर्यातक को आटा मिलों के साथ वैध सप्लाई या अनुबंध होना जरूरी होगा।

घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता

सरकार ने महंगाई और घरेलू मांग को ध्यान में रखते हुए 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी। हालांकि, जरूरतमंद देशों को सीमित मात्रा में गेहूं भेजा जाता रहा है। चालू वित्त वर्ष में भारत ने नेपाल को करीब 2 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है। इसके अलावा भूटान और माली जैसे देशों को भी आपात जरूरत के तहत आपूर्ति की गई।

किन उत्पादों को मिलेगी छूट

इस नई व्यवस्था के तहत गेहूं का आटा, मैदा और सूजी का निर्यात किया जा सकेगा। हालांकि, कच्चे गेहूं का निर्यात अब भी प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का मकसद घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखते हुए वैल्यू-एडेड एग्री प्रोडक्ट्स के जरिए भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक बाजार में बढ़ावा देना है।

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