Edited By jyoti choudhary,Updated: 30 Sep, 2026 11:05 AM

सरकार की ओर से खाद्य तेल और चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बीच दालों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले महीने में चना, मूंग, मटर और अरहर जैसी मुख्य दालों की थोक कीमतों में 10% तक की तेजी
नई दिल्लीः सरकार की ओर से खाद्य तेल और चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बीच दालों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले महीने में चना, मूंग, मटर और अरहर जैसी मुख्य दालों की थोक कीमतों में 10% तक की तेजी आई है। वहीं, पिछले एक सप्ताह में इनकी कीमतें करीब 3-5% बढ़ी हैं।
इंडस्ट्री बॉडी 'इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन' (IPGA) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने चने की दाल दिल्ली को छोड़कर अन्य प्रमुख बाजारों में करीब 11% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि हफ्ते-दर-हफ्ते इसमें 5.5% की बढ़ोतरी हुई है।
अरहर की कीमत में एक महीने में 6.5% और पिछले एक सप्ताह में 2.4% की वृद्धि दर्ज की गई। मूंग के दाम महीनेभर में 10.6% और सप्ताहभर में 4.3% बढ़े। मटर की कीमत भी एक महीने में 6% और पिछले सप्ताह 3% बढ़ी है।
सालभर में मटर 47% तक महंगा
सालाना आधार पर भी कई दालों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चने के दाम करीब 23%, उड़द 24% और मटर की कीमत 47% तक बढ़ी है। दूसरी ओर, मसूर और मूंग की कीमतों में सालभर में क्रमशः करीब 2% और 4% की मामूली बढ़ोतरी हुई है।
मौसम और त्योहारी मांग का असर
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, कम बारिश और कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति के कारण दालों की फसल और आने वाली बुवाई को लेकर चिंता बढ़ी है। कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है।
IPGA के सचिव सतीश उपाध्याय के अनुसार, चने की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। नमी की कमी से रबी की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से चने की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में कम रहने की उम्मीद है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली मटर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पीली मटर को चने के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रूस से आपूर्ति प्रभावित होने और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से भी दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।