छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों की संपत्ति की गुणवत्ता में मई में सुधार

Edited By Updated: 29 Jun, 2026 05:43 PM

asset quality of small value lending financial institutions improved may

छोटी राशि के कर्ज देने वाले सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) की संपत्ति की गुणवत्ता में मई में सुधार हुआ है। एमएफआई ने सभी श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन किया है। कर्ज के बारे में सूचना देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्क ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह...

मुंबईः छोटी राशि के कर्ज देने वाले सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) की संपत्ति की गुणवत्ता में मई में सुधार हुआ है। एमएफआई ने सभी श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन किया है। कर्ज के बारे में सूचना देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्क ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जो पीछे चल रहे हैं और एमएफआई के लिए अधिक दबाव पैदा कर रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, मई में एक से 30 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज, कुल 3.33 लाख करोड़ रुपए के कुल ऋण का 0.6 प्रतिशत थे, जो अप्रैल में 0.8 प्रतिशत थे। वहीं, 31-180 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का आंकड़ा 1.6 प्रतिशत रहा, जबकि पहले यह 1.7 प्रतिशत था। हालांकि, पोर्टफोलियो में यह सुधार सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। क्रिफ ने कहा, ''पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कर्ज लौटाने में चूक का स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।'' 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में 30 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का स्तर 1.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.6 प्रतिशत है। वहीं, 31-180 दिन वाले ऋण का स्तर दो प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.6 प्रतिशत है। इसी तरह, मध्य प्रदेश के मामले में, एक से 30 दिन तक बिना भुगतान वाला कर्ज राष्ट्रीय औसत के बराबर था लेकिन 31-180 दिन वाले कर्ज का स्तर दो प्रतिशत था। राजस्थान के लिए, 31-180 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का स्तर 1.9 प्रतिशत था। 

क्रिफ के अनुसार, सकल कर्ज मासिक आधार पर 0.7 प्रतिशत बढ़कर 3.33 लाख करोड़ रुपए हो गया। वहीं औसत कर्ज आकार 61,000 रुपए पर स्थिर रहा। यह उधार लेने वालों की मांग और कर्ज देने वालों के अनुशासन को दिखाता है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सक्रिय खातों की संख्या में मामूली 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 10.58 करोड़ रह गई। 
 

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