Edited By Rohini Oberoi,Updated: 29 Jun, 2026 11:07 AM

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और ट्रस्ट के पैसों के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले में एक बड़ी और अहम कानूनी खबर सामने आई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
Supreme Court Ram Mandir Donation Case : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और ट्रस्ट के पैसों के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले में एक बड़ी और अहम कानूनी खबर सामने आई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की और पूछा कि आखिर इस मामले को इतनी जल्दी सुनने की क्या जरूरत है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोर्ट की छुट्टियां खत्म होने के बाद ही नियमित तौर पर सुनवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पैसों और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई थीं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि ट्रस्ट के पैसों के लेन-देन में कुछ गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं इसलिए इस मामले में तुरंत एक आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज की जानी चाहिए। याचिका में सिर्फ पुलिस एफआईआर की मांग नहीं थी बल्कि यह भी कहा गया था कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए जिसकी कप्तानी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए।
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याचिकाकर्ता चाहते हैं कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी (Court-Monitored Investigation) में हो और इसके लिए एक डेडलाइन (तय समय सीमा) निर्धारित की जाए ताकि जांच में देरी न हो। वहीं जब यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत की पीठ के सामने आया तो याचिकाकर्ता के वकील ने इस पर 'अर्जेंट हियरिंग' (तुरंत सुनवाई) और फौरन आदेश जारी करने का पुरजोर आग्रह किया।
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को देखने के बाद तत्काल सुनवाई की आवश्यकता को खारिज कर दिया। बेंच ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल पूछा कि इस याचिका को अभी के अभी सुनने जैसी कोई गंभीर या आपातकालीन वजह नजर नहीं आती तो फिर इसमें इतनी जल्दबाजी किस बात की है?
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तत्काल राहत देने से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट के वेकेशन (सर्दियों/गर्मियों की छुट्टियां) खत्म होने और कोर्ट के दोबारा पूरी तरह खुलने के बाद ही सूचीबद्ध (List) किया जाएगा। इसका साफ मतलब यह है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े इस विवाद पर कानूनी कार्यवाही शुरू होने में अभी याचिकाकर्ता को कुछ समय का इंतजार करना होगा।