87 लाख की ठगी, BSNL की एक गलती से खाली हो गया खाता, हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला

Edited By Updated: 06 Jun, 2026 12:24 PM

bsnl to pay 55 lakh compensation to the bank here details case

टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल की लापरवाही की वजह से एक को-ऑपरेटिव बैंक के खाते से साइबर ठगों ने 87 लाख रुपए से ज्यादा उड़ा दिए। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में बीएसएनएल को बैंक को 55 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी कहा है...

बिजनेस डेस्कः टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल की लापरवाही की वजह से एक को-ऑपरेटिव बैंक के खाते से साइबर ठगों ने 87 लाख रुपए से ज्यादा उड़ा दिए। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में बीएसएनएल को बैंक को 55 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि इस राशि पर धोखाधड़ी की तारीख से 9% की दर से वार्षिक ब्याज भी दिया जाए।

क्या है मामला

मामला ‘श्री बसवेश्वर पट्टाना सहकारी बैंक नियमित’ का है। इस बैंक का केनरा बैंक में एक चालू खाता था, जो इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ा हुआ था। खाते से जुड़े वित्तीय लेन-देन के लिए OTP इसी बैंक के रजिस्टर्ड BSNL मोबाइल नंबर पर प्राप्त होते थे। फरवरी 2019 में बैंक के खाते से 7 बार में कुल 87.7 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। जब जांच हुई तो पता चला कि बेंगलुरु के एक बीएसएनएल दफ्तर से किसी अनजान शख्स ने बैंक की जानकारी के बिना उसका डुप्लीकेट सिम निकलवा लिया था। असली सिम बंद हो गया और ठगों ने डुप्लीकेट सिम पर OTP मंगाकर पूरा अकाउंट खाली कर दिया। हालांकि, पुलिस ने बाद में करीब 37 लाख रुपए रिकवर कर लिए थे लेकिन बैंक को फिर भी 50.5 लाख का नेट लॉस हुआ।

यह भी पढ़ें: सस्ता हुआ कच्चा तेल....तो बदल गए पेट्रोल-डीजल के दाम, कीमतों पर डालें नजर

हाईकोर्ट ने BSNL को ठहराया जिम्मेदार

बैंक ने BSNL और केनरा बैंक को कानूनी नोटिस भेजने के बाद मामला स्थायी लोक अदालत में उठाया। अदालत ने बीएसएनएल की लापरवाही स्वीकार करते हुए 5 लाख रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया। इसके बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा। 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी बैंक का मोबाइल नंबर OTP बेस्ड वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हो, तब टेलीकॉम कंपनी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। अदालत ने माना कि किसी ग्राहक की जानकारी या अनुमति के बिना उसका मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम जारी करना गंभीर लापरवाही है।

यह भी पढ़ें: लगातार तीसरे दिन टूटी चांदी, सोना भी फिसला, चेक करें कितनी आई गिरावट

बीमा भुगतान से दोषी पक्ष की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती

BSNL ने अपनी दलील में कहा कि कि बैंक को बीमा कंपनी से मुआवजा मिल चुका है, इसलिए उसे और पेमेंट नहीं करना चाहिए। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बीमा का पैसा मिलने से दोषी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

हाईकोर्ट ने बीएसएनएल की याचिका खारिज करते हुए बैंक के पक्ष में मुआवजा बढ़ा दिया। अदालत ने बीएसएनएल को 50.5 लाख रुपए की नुकसान भरपाई, 5 लाख रुपए अतिरिक्त हर्जाना और धोखाधड़ी की तारीख से 9% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।


 

Related Story

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!