Edited By jyoti choudhary,Updated: 24 Jun, 2026 05:06 PM

मुंबई में एक कपल को करीब 10 सालों से कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। फ्लैट की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद बिल्डर ने वही आवास किसी अन्य खरीदार को बेच दिया था। अब उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को खरीदारों की रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
बिजनेस डेस्कः मुंबई में एक कपल को करीब 10 सालों से कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। फ्लैट की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद बिल्डर ने वही आवास किसी अन्य खरीदार को बेच दिया था। अब उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को खरीदारों की रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?
मामला मुंबई का था जहां पर एक कपल ने बिल्डर के जरिए फ्लैट खरीदा था। मोहम्मद जलील हार्नेकर और उनकी पत्नी असगर शबनम ने 2013 में 660 वर्ग फुट का फ्लैट बुक कराया था। शुरुआत में उन्होंने डोंगरी की एक आवासीय परियोजना में निवेश किया था लेकिन परियोजना ठप पड़ने के बाद बिल्डर ने उनकी बुकिंग को मजगांव स्थित ‘बे व्यू’ परियोजना में स्थानांतरित कर दिया। फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपए तय की गई, जिसे दंपति ने 2018 तक पूरी तरह चुका दिया।
इसके बावजूद उन्हें न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही बिक्री समझौते का पंजीकरण कराया गया। बाद में जांच में पता चला कि बिल्डर ने वही फ्लैट किसी दूसरे खरीदार को बेच दिया था। दंपति ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो बिल्डर ने 1.25 करोड़ रुपए के चेक जारी किए लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़ितों ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
क्या कहा आयोग ने?
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बिल्डर के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना। आयोग ने आदेश दिया कि बिल्डर दंपति को 1.05 करोड़ रुपए की राशि 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 50,000 रुपए और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 25,000 रुपए का भुगतान भी करना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी जाएगी। करीब 10 वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करने वाले इस दंपति के लिए आयोग का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है और यह रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है।