नोटबंदी के 5 साल बाद भी लोगों में बढ़ा कैश का चलन, मार्केट में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर

Edited By Updated: 05 Nov, 2021 02:26 PM

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नोटबंदी को पांच साल पूरे हो चुके हैं। सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के 5 साल बाद भी लोगों के पास करेंसी में बढ़ोतरी जारी है। इस साल त्योहारी समय में बाजार में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। 8 अक्टूबर, 2021 को

बिजनेस डेस्कः नोटबंदी को पांच साल पूरे हो चुके हैं। सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के 5 साल बाद भी लोगों के पास करेंसी में बढ़ोतरी जारी है। इस साल त्योहारी समय में बाजार में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। 8 अक्टूबर, 2021 को समाप्त पखवाड़े में लोगों के पास करेंसी 28.30 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड हाई स्तर पर रही। 4 नवंबर, 2016 को 17.97 लाख करोड़ रुपए के स्तर से 57.48 फीसदी या 10.33 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। 25 नवंबर, 2016 को दर्ज 9.11 लाख करोड़ रुपए से लोगों के पास नकदी 211 फीसदी बढ़ी है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को देशव्यापी ज्यादा मूल्य वाले करेंसी की नोटबंदी का ऐलान किया था। सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के नोटों को बंद कर दिया था, जो चलन में थे। बाद में 500 के नोट तो जारी किए गए लेकिन 1000 रुपए के नए नोट नहीं जारी किए गए।

सिस्टम में बढ़ रही है नकदी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर, 2020 को समाप्त पखवाड़े में दिवाली त्योहार से पहले लोगों के पास करेंसी में 15,582 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर इसमें 8.5 फीसदी या 2.21 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई।

नवंबर 2016 में 500 और 1,000 रुपए के नोट वापस लेने के बाद लोगों के पास करेंसी, जो 4 नवंबर 2016 को 17.97 लाख करोड़ रुपए थी, जनवरी 2017 में घटकर 7.8 लाख करोड़ रुपए रह गई। सरकार और आरबीआई द्वारा लेस कैश सोसायटी के लिए उठाए गए कदम के बावजूद सिस्टम में नकदी लगातार बढ़ रही है। भुगतान के डिजिटलीकरण और विभिन्न लेनदेन में नकदी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया गया है।

कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन ने लोगों के पास मौजूद करेंसी में बढ़ोतरी में बड़ी भूमिका निभाई है। दुनिया भर के देशों ने फरवरी में लॉकडाउन की घोषणा की और भारत सरकार ने भी मार्च में लॉकडाउन की घोषणा की। लोगों ने अपने किराने और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए नकदी जमा करना शुरू कर दिया, जो कि मुख्य रूप से पड़ोस की किराने की दुकानों द्वारा पूरी की जा रही थी।
 

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