चांदी में चीन की रिकॉर्ड खरीदारी, मार्च 2026 में 836 टन आयात, क्यों बढ़ी मांग?

Edited By Updated: 22 Apr, 2026 01:47 PM

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मार्च 2026 में वैश्विक बाजार भले ही स्थिर नजर आ रहे थे लेकिन चांदी की मांग ने सभी को चौंका दिया। जहां निवेशकों की नजर लगातार सोने पर बनी हुई थी, वहीं चीन में चुपचाप चांदी की रिकॉर्ड खरीदारी हो रही थी।

बिजनेस डेस्कः मार्च 2026 में वैश्विक बाजार भले ही स्थिर नजर आ रहे थे लेकिन चांदी की मांग ने सभी को चौंका दिया। जहां निवेशकों की नजर लगातार सोने पर बनी हुई थी, वहीं चीन में चुपचाप चांदी की रिकॉर्ड खरीदारी हो रही थी।

आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने मार्च में करीब 836 टन चांदी का आयात किया, जो अब तक किसी भी मार्च महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। यह फरवरी की तुलना में लगभग 78% अधिक और पिछले 10 वर्षों के औसत से करीब 173% ज्यादा है। यह सिर्फ बड़ा आंकड़ा नहीं था, बल्कि अब तक का रिकॉर्ड स्तर था यानी चीन ने इतिहास में किसी भी मार्च महीने में इतनी चांदी पहले कभी नहीं खरीदी थी।

साल 2026 की शुरुआत से अब तक चीन कुल 1,626 टन चांदी खरीद चुका है, जो बताता है कि यह कोई अचानक हुआ कदम नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती मांग का नतीजा है।

क्यों बढ़ी चांदी की मांग?

विशेषज्ञों के अनुसार इसके दो बड़े कारण हैं:

1. निवेशकों का रुख बदलाव

जब सोने की कीमतें लगातार ऊंची हो गईं, तो छोटे निवेशकों ने सस्ते और आसान विकल्प के तौर पर चांदी की ओर रुख किया। कम कीमत और सुरक्षित निवेश विकल्प होने की वजह से सिल्वर बार की मांग तेजी से बढ़ी।

2. इंडस्ट्रियल डिमांड

चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब है। सोलर पैनल निर्माण में चांदी की बड़ी भूमिका होती है। टैक्स रिबेट और उत्पादन बढ़ाने की रणनीति के चलते कंपनियों ने बड़े पैमाने पर चांदी का स्टॉक जमा किया।

अनुमान है कि वैश्विक सोलर इंडस्ट्री हर साल कुल चांदी सप्लाई का लगभग 20% इस्तेमाल करती है, जिसमें चीन का सबसे बड़ा योगदान है।

वैश्विक बाजार पर असर

चीन की इस भारी खरीदारी से वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। अगर मांग इसी तरह बनी रही और उत्पादन नहीं बढ़ा, तो आने वाले समय में चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। ट्रेडर्स अब चांदी को सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश अवसर के रूप में देखने लगे हैं।

भारत पर क्या असर?

भारत में चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ परंपरागत रूप से भी बहुत ज्यादा होता है—जैसे गहने, सिक्के और पूजा सामग्री में। अगर वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं, तो भारतीय बाजार में भी चांदी महंगी हो सकती है। साथ ही सिल्वर ETF और डिजिटल सिल्वर में निवेश का आकर्षण भी बढ़ सकता है।

 

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