Coriander rate Hike: सातवें आसमान पर पहुंचे धनिया के दाम, ₹230 किलो तक पहुंचा भाव, अदरक-लहसुन भी हुआ महंगा

Edited By Updated: 15 Aug, 2026 12:16 PM

coriander prices skyrocket reaching 230 per kg ginger garlic

Coriander rate Hike: भारतीय घरों में सब्जी खरीदते समय मुफ्त मिलने वाली धनिया की गड्डी अब जेब पर भारी पड़ रही है। भारी बारिश के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से धनिया की कीमतों में तेज उछाल आया है। कुछ बाजारों में इसकी खुदरा कीमत 220-230 रुपए प्रति...

Coriander rate Hike: भारतीय घरों में सब्जी खरीदते समय मुफ्त मिलने वाली धनिया की गड्डी अब जेब पर भारी पड़ रही है। भारी बारिश के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से धनिया की कीमतों में तेज उछाल आया है। कुछ बाजारों में इसकी खुदरा कीमत 220-230 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि थोक भाव करीब 175 रुपए प्रति किलो बताया जा रहा है।

धनिया के साथ अदरक, लहसुन और प्याज जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतें भी पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़ी हैं। इससे रसोई के बजट पर दबाव बढ़ रहा है।

अदरक की महंगाई 83% के पार

जुलाई में अदरक की महंगाई दर बढ़कर 83.62% हो गई, जो जून में 50.41% थी। इसी तरह लहसुन की महंगाई दर 17.93% से बढ़कर 35.36% और प्याज की महंगाई दर 4.73% से बढ़कर 22.54% हो गई।

हालांकि, सब्जियों की पूरी टोकरी में महंगाई का असर एक जैसा नहीं है। आलू की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 16.56% नीचे हैं। टमाटर और मटर भी अपेक्षाकृत सस्ते हुए हैं। ऐसे में खाद्य महंगाई का दबाव पारंपरिक आलू-प्याज-टमाटर की बजाय रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों से ज्यादा दिखाई दे रहा है।

जुलाई में खाद्य महंगाई बढ़ी

भारत में खाद्य महंगाई दर जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गई। धनिया और दूसरी हरी सब्जियों की कीमतों में तेजी के पीछे मुख्य वजह बारिश से सप्लाई में आई रुकावट बताई जा रही है।

नासिक से धनिया की आवक प्रभावित होने के बाद थोक बाजारों में इसकी कीमत तेजी से बढ़ी। धनिया जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए खेतों से मंडियों और फिर खुदरा बाजारों तक इसकी सप्लाई में थोड़ी भी बाधा कीमतों पर तुरंत असर डाल सकती है।

बारिश का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा चिंता

इस साल मॉनसून का व्यवहार भी असमान रहा है। जून में देश में बारिश सामान्य से **39.8% कम** रही, जबकि जुलाई में कई इलाकों में अचानक भारी बारिश हुई। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में फिर बारिश की कमी देखने को मिली।

ऐसे मौसम में जल्दी खराब होने वाली फसलों की सप्लाई सबसे पहले प्रभावित होती है। लंबे सूखे के बाद अचानक भारी बारिश से खेतों से मंडियों तक आवक और परिवहन दोनों पर असर पड़ सकता है।

भारत की करीब आधी कृषि भूमि अभी भी सिंचाई के लिए मॉनसून पर निर्भर है। इसलिए बारिश के इस तरह असमान रहने से सब्जियों के साथ-साथ दालों और अनाज की फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

अल नीनो ने बढ़ाई चिंता

मॉनसून के दूसरे हिस्से में बन रहे अल नीनो के कारण मौसम को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है। अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से लंबे समय तक बारिश नहीं होने और फिर कम समय में भारी बारिश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक भी असमान मॉनसून को खाद्य महंगाई के लिए जोखिम मान चुका है। खाद्य पदार्थों की CPI बास्केट में करीब आधी हिस्सेदारी है, इसलिए बारिश में गड़बड़ी का असर सीधे महंगाई के आंकड़ों और घरेलू बजट पर पड़ सकता है।

दालों और चावल पर भी नजर

मॉनसून की अनिश्चितता का असर दालों की बुवाई पर भी दिखाई दे रहा है। 17 जुलाई तक दालों की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 15% कम था। जून में मध्य भारत में कम बारिश और मॉनसून की देरी को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।

चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत मई में 42.92 रुपए प्रति किलो से बढ़कर जुलाई में 44.35 रुपए प्रति किलो हो गई यानी करीब 3.33% की बढ़ोतरी।

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