Edited By jyoti choudhary,Updated: 12 Sep, 2026 05:30 PM

एथेनॉल सप्लाई ईयर (ई.एस.वाई.) 2025-26 के तहत अगस्त 2026 के अंत तक भारत में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई है। इसमें करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित फीडस्टॉक से आया है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (ए.आई.डी.ए.)
नई दिल्ली: एथेनॉल सप्लाई ईयर (ई.एस.वाई.) 2025-26 के तहत अगस्त 2026 के अंत तक भारत में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई है। इसमें करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित फीडस्टॉक से आया है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (ए.आई.डी.ए.) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार कुल आपूर्ति तय किए गए 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंध का करीब 85 प्रतिशत है। ए.आई.डी.ए. के अनुसार अगस्त के अंत तक कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति में से 624 करोड़ लीटर अनाज आधारित स्रोतों से प्राप्त हुआ, जबकि 271 करोड़ लीटर चीनी आधारित फीडस्टॉक से आया।
मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्त्ता
अनाज आधारित स्रोतों में मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्त्ता रहा। इससे 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के अतिरिक्त चावल से 214 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई।
वहीं, चीनी आधारित फीडस्टॉक से अगस्त के अंत तक कुल 271 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसमें गन्ने के रस से 149 करोड़ लीटर, बी-हैवी मोलासेस से 107 करोड़ लीटर और सी-हैवी मोलासेस से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल शामिल है।
उत्पादन बढ़ने के साथ खपत के नए अवसर जरूरी
ए.आई.डी.ए. ने कहा कि देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगली बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि उत्पादन में वृद्धि के अनुरूप एथेनॉल के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त और स्थिर अवसर भी उपलब्ध हों।
भारत मौजूदा एथेनॉल-ब्लैंडिंग व्यवस्था से आगे बढ़कर फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों (एफ.एफ.वी.), कंप्रैस्ड बायोगैस (सी.बी.जी.), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एस.ए.एफ.) और अन्य क्षेत्रों में एथेनॉल के व्यापक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में एथेनॉल की बढ़ती उपलब्धता के लिए नए उपयोग क्षेत्रों का विकास महत्वपूर्ण होगा।