Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Sep, 2026 04:08 PM

भारत के FMCG सेक्टर में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मांग सुस्त पड़ती नजर आई है। नीलसन आईक्यू (NielsenIQ) की Q2 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में FMCG सेक्टर की कुल बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 2% की गिरावट दर्ज की
नई दिल्लीः भारत के FMCG सेक्टर में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मांग सुस्त पड़ती नजर आई है। नीलसन आईक्यू (NielsenIQ) की Q2 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में FMCG सेक्टर की कुल बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 2% की गिरावट दर्ज की गई। मूल्य के आधार पर ग्रोथ केवल 0.8% रही, जबकि इस दौरान कीमतों में करीब 2.8% की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, FMCG बास्केट की 68% कैटेगरी में बिक्री में गिरावट आई है।
बढ़ती लागत और कमजोर मांग का असर
FMCG कंपनियों के सामने एक तरफ कच्चे माल की बढ़ती लागत चुनौती बनी हुई है, तो दूसरी ओर ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ी है। ऐसे माहौल में कंपनियों के लिए कीमतों को स्थिर रखते हुए मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीण बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित
ग्रामीण भारत में FMCG बिक्री में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि शहरी बाजार में बिक्री लगभग स्थिर रही। ग्रामीण मांग पर कमजोर आय, रोजगार से जुड़ी चुनौतियों और मौसम की अनिश्चितता का असर देखने को मिला।
जून में बारिश सामान्य से कम रहने के कारण खेती और बुवाई पर भी असर पड़ा। इसके अलावा ग्रामीण बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी और श्रम बल भागीदारी में कमी ने ग्रामीण परिवारों की खर्च करने की क्षमता को प्रभावित किया।
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे सात राज्यों से कुल बिक्री गिरावट का बड़ा हिस्सा आया।
किराना से ऑनलाइन शॉपिंग की ओर बढ़ रहे ग्राहक
FMCG बाजार में ग्राहकों के खरीदारी के तरीके में भी बदलाव जारी है। देश में अभी भी करीब 82% FMCG बिक्री पारंपरिक किराना दुकानों से होती है लेकिन इस तिमाही में इन दुकानों की बिक्री में 6% की गिरावट दर्ज हुई।
इसके उलट मॉडर्न ट्रेड में 17.5% की ग्रोथ रही। ई-कॉमर्स बिक्री में भी 34.8% की तेजी दर्ज की गई। खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। महानगरों में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी भी बढ़ी है।
छोटी FMCG कंपनियों पर ज्यादा दबाव
बढ़ती लागत और कमजोर मांग का असर छोटी कंपनियों पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ा है। 5,000 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वाली कंपनियों की बिक्री में करीब 1% की गिरावट रही, जबकि 100 करोड़ रुपये से कम राजस्व वाली कंपनियों की बिक्री 10.5% तक घटी।
कम कीमत वाले ₹5 और ₹10 के छोटे पैक कंपनियों के लिए विशेष चुनौती बने हुए हैं। लागत बढ़ने से इन उत्पादों पर मार्जिन कम हो रहा है और पारंपरिक किराना चैनल के जरिए बिक्री करना ज्यादा मुश्किल हो रहा है।
जरूरी सामानों की मांग में भी कमी
मांग में कमजोरी अब केवल गैर-जरूरी उत्पादों तक सीमित नहीं रही। खाने-पीने की FMCG कैटेगरी में 1.1% और होम केयर व पर्सनल केयर उत्पादों में 4.3% की गिरावट दर्ज की गई।
OTC और हेल्थ से जुड़े उत्पादों में भी बिक्री कमजोर रही। इम्युनिटी प्रोडक्ट्स, बेबी केयर, स्किन ट्रीटमेंट और दर्द-कफ-जुकाम से जुड़े उत्पादों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि FMCG कंपनियों के लिए आने वाले समय में ग्रामीण मांग को मजबूत करना, लागत पर नियंत्रण रखना और बदलते उपभोक्ता खरीदारी पैटर्न के अनुरूप वितरण रणनीति तैयार करना अहम चुनौती रहेगी।