Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 Feb, 2026 06:46 PM

देश में महंगाई का दबाव फिर बढ़ता दिख रहा है। FMCG यानी रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे प्रोडक्ट्स 5% तक महंगे हो गए हैं और नए दामों...
बिजनेस डेस्कः देश में महंगाई का दबाव फिर बढ़ता दिख रहा है। FMCG यानी रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे प्रोडक्ट्स 5% तक महंगे हो गए हैं और नए दामों वाले पैकेट बाजार में पहुंचने लगे हैं।
सितंबर 2025 में जीएसटी कटौती के बाद कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखी थीं लेकिन अब कच्चे माल की बढ़ती लागत और रुपए की कमजोरी ने मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है।
कंपनियों ने क्यों बढ़ाए दाम?
एक रिपोर्ट के अनुसार, Dabur India Ltd के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी इस तिमाही में करीब 2% कीमतें बढ़ा रही है। एंटी-प्रॉफिटियरिंग नियमों के चलते पहले कीमतें नहीं बढ़ाई जा सकीं लेकिन अब लागत दबाव के कारण यह जरूरी हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सल्फर और एन-पैराफिन जैसे इनपुट महंगे हुए हैं। वहीं, नारियल तेल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।
रुपए की कमजोरी का असर
30 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। आयातित कच्चे माल पर निर्भर कंपनियों की लागत इससे काफी बढ़ गई है।
ब्रेकफास्ट सीरियल बनाने वाली Bagrry's India Ltd के ग्रुप डायरेक्टर आदित्य बैगरी ने कहा कि ओट्स और बादाम जैसी आयातित सामग्री महंगी हो गई है, इसलिए चुनिंदा पैकेट्स पर कीमत बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
होम केयर और पर्सनल केयर प्रोडक्ट भी महंगे
Hindustan Unilever Ltd ने संकेत दिया है कि उसके होम केयर सेगमेंट में कीमतें बढ़ेंगी। इसमें सर्फ एक्सेल, रिन, विम और डोमेक्स जैसे उत्पाद शामिल हैं।
चाय की कीमतों में भी बदलाव संभव
Tata Consumer Products Ltd के एमडी सुनील डी’सूजा ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों के आधार पर चाय की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
मुनाफे पर दबाव
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 की तीसरी तिमाही में 9% सालाना राजस्व वृद्धि के बावजूद FMCG कंपनियों को मुनाफा बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। हालांकि, जीएसटी कटौती के चलते बिस्कुट, नूडल्स और स्नैक फूड्स की बिक्री मात्रा में करीब 6% की वृद्धि देखी गई।
कुल मिलाकर, लागत बढ़ने और रुपए की कमजोरी के चलते आने वाले महीनों में रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।