Edited By jyoti choudhary,Updated: 26 Jun, 2026 06:19 PM

खाड़ी देशों में तनाव कुछ कम होने की खबर के बीच एक नई मुसीबत सामने आ रही है। युद्ध विराम के बाद अब होर्मुज से जहाजों का आना-जाना तो दोबारा तेजी से शुरू हो गया है लेकिन अब वहां जहाजों की भारी कमी हो गई है। इसी वजह से भारत आने वाले एक बड़े तेल टैंकर का...
बिजनेस डेस्कः खाड़ी देशों में तनाव कुछ कम होने की खबर के बीच एक नई मुसीबत सामने आ रही है। युद्ध विराम के बाद अब होर्मुज से जहाजों का आना-जाना तो दोबारा तेजी से शुरू हो गया है लेकिन अब वहां जहाजों की भारी कमी हो गई है। इसी वजह से भारत आने वाले एक बड़े तेल टैंकर का किराया सामान्य दर से करीब 9 गुना ज्यादा तय हुआ है जो इस साल का सबसे महंगा किराया बताया जा रहा है।
इसके साथ दक्षिण कोरिया की शिपिंग कंपनी सिनोकोर की इस बुकिंग ने साफ कर दिया है कि होर्मुज वाला संकट खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब एक नए रूप में सामने आ गया है।
रिकॉर्ड किराए की बुकिंग
फारस की खाड़ी से भारत तक कच्चा तेल लाने के लिए जिस बड़े जहाज को बुक किया गया है, उसमें करीब 20 लाख बैरल तेल आ सकता है। शिप ब्रोकर्स के मुताबिक इसका किराया सामान्य से लगभग 9 गुना ज्यादा तय हुआ है और यह साल की सबसे बड़ी बुकिंग है। यह आंकड़ा खुद बताता है कि भले ही तनाव की खबरें कम हो गई हों, लेकिन समंदर में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं।
रास्ता खुला तो जहाजों की कमी सामने आई
जून 2026 में अमरीका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद तनाव कुछ कम हुआ तो तेल कंपनियों ने राहत की सांस ली और दोबारा खाड़ी से तेल मंगाने की कोशिश शुरू की, लेकिन यहीं से असली मुसीबत शुरू हुई। तेल तो वहां मौजूद है लेकिन उसे लाने के लिए पर्याप्त जहाज नहीं बचे हैं।
तनाव के महीनों में कई जहाज वहां से दूर चले गए थे और अब वापसी इतनी जल्दी नहीं हो पा रही। तनाव कम होने के बाद ओमान की खाड़ी में एक हफ्ते के अंदर सिर्फ 65 खाली जहाज ही पहुंच सकते हैं, जिनमें से 25 जहाज सिर्फ सिनोकोर कंपनी के पास हैं। मांग ज्यादा है और जहाज कम हैं इसलिए खरीदार मजबूरी में मुंह मांगी कीमत दे रहे हैं।
भारत की सतर्कता और कूटनीति
इस पूरे संकट में भारत की तरफ से क्या किया जा रहा है, यह भी जानना जरूरी है। भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट पर है। सरकार भारत के समुद्री हितों को बचाने के लिए लगातार अंतर्राष्ट्रीय एजैंसियों के साथ बातचीत में जुटी है।
राहत की बात यह है कि 94 भारतीय नाविक और 8.6 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल से भरे 3 भारतीय जहाज देश वैभव, देश विभोर और सन्मार हेराल्ड इस खतरनाक रास्ते को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। ये जहाज 24 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच भारत के बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमरीका-ईरान समझौते के बाद से भारत आने वाले कुल 11 जहाज इस रास्ते को सुरक्षित पार कर चुके हैं।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
आम आदमी की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह सवाल सबसे ज्यादा मायने रखता है। दिलचस्प बात यह है कि जहाजों का किराया भले ही 9 गुना तक बढ़ गया हो लेकिन दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत फिलहाल गिरकर करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।
फिर भी जब तक जहाजों की किल्लत बनी रहेगी, तब तक भारत की सरकारी तेल कंपनियों को राहत मिलना मुश्किल है, जो संकट के समय हर दिन करीब 650 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही थीं। अगर आने वाले हफ्तों में जहाजों की सप्लाई सामान्य होती है तो भारत का आयात बिल कम होगा, रुपए को मजबूती मिलेगी और पैट्रोल-डीजल की महंगाई को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी, लेकिन तब तक के लिए टैंशन बरकरार रहने वाली है।