Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 May, 2026 11:33 AM

देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है यानी अब भारत से विदेशों में चीनी भेजना आसान नहीं होगा। सरकार की ओर से जारी...
बिजनेस डेस्कः देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है यानी अब भारत से विदेशों में चीनी भेजना आसान नहीं होगा। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि अब चीनी का निर्यात “प्रतिबंधित” श्रेणी से हटाकर “निषिद्ध” श्रेणी में डाल दिया गया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा कि कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। हालांकि यूरोपीय संघ और अमेरिका को सीएक्सएल और शुल्क दर कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाले निर्यात पर यह फैसला लागू नहीं होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्रिम प्राधिकरण योजना, सरकार-से-सरकार निर्यात और पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल खेपों को इस आदेश से छूट दी गई है।
चीनी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए खाद्य मंत्रालय ने शुरुआत में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। बाद में 5 लाख टन का अतिरिक्त कोटा भी जारी किया गया, जिसमें से करीब 87 हजार टन को मंजूरी मिली। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 16 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।
उद्योग संगठनों के मुताबिक, भारत में चीनी उत्पादन में इस साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) के अनुसार, अप्रैल 2026 तक देश का चीनी उत्पादन 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2.752 करोड़ टन हो गया। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेहतर उत्पादन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि निर्यात पर नियंत्रण से घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। खासतौर पर महंगाई और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि भारत ने अक्टूबर 2022 में भी चीनी निर्यात पर नियंत्रण लगाया था, जिसे समय-समय पर आगे बढ़ाया जाता रहा है।