सरकार ने केवल निर्यात के लिए भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में FDI की अनुमति दी

Edited By Updated: 23 Jul, 2026 05:51 PM

government permitted fdi in inventory based e commerce solely for exports

सरकार ने केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी। इस कदम से छोटे खुदरा कारोबारियों के कारोबार पर असर डाले बिना भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।...

नई दिल्लीः सरकार ने केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी। इस कदम से छोटे खुदरा कारोबारियों के कारोबार पर असर डाले बिना भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल के तहत खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति नहीं है।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने प्रेस नोट में कहा, ''भारतीय विक्रेताओं को वैश्विक बाजारों तक आसान और व्यापक पहुंच उपलब्ध कराकर निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से मौजूदा एफडीआई नीति की समीक्षा की गई है। इसके तहत यह निर्णय लिया गया है कि देश में विनिर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के निर्यात के मामले में माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर लागू प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।'' वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाला उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े मामलों को देखता है। विभाग प्रेस नोट (पीएन) के माध्यम से एफडीआई नीति में बदलाव जारी करता है। 

मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के अनुसार, कारोबार-से-कारोबार (बी2बी) ई-कॉमर्स और मार्केटप्लेस मॉडल में एफडीआई की अनुमति है। कंपनी-से-उपभोक्ता (बी2सी) मॉडल में ई-कॉमर्स और इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में एफडीआई की अनुमति नहीं है। इस मॉडल में वस्तुओं और सेवाओं का भंडार ई-कॉमर्स कंपनी के स्वामित्व में होता है और उन्हें सीधे उपभोक्ताओं को बेचा जाता है। डीपीआईआईटी ने नीति में एक नया प्रावधान जोड़ा है जिसके अनुसार, ''ई-कॉमर्स इकाई को विदेश व्यापार नीति, 2023 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात) विनियम, 2015 के लागू प्रावधानों के अनुरूप भारत में विनिर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के केवल निर्यात के लिए माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल अपनाने की अनुमति होगी।''

विभाग ने कहा कि ई-कॉमर्स के माध्यम से वस्तुओं/उत्पादों के निर्यात के मामले में बी2सी और भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर लागू प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। यह निर्णय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा। इस प्रस्ताव की शुरुआत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने की थी। इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स के माध्यम से भारत के निर्यात को बढ़ावा देना है। ई-कॉमर्स क्षेत्र के हितधारकों ने भी ऐसी व्यवस्था की मांग की थी। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ई-कॉमर्स के जरिये निर्यात बढ़ाने के उपायों पर काम कर रही है। सरकार ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र (ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट हब) स्थापित करने जैसे अन्य उपायों पर भी काम कर रही है। 

अनुमानों के अनुसार, वर्तमान में भारत का ई-कॉमर्स निर्यात लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर का है जबकि चीन का करीब 350 अरब अमेरिकी डॉलर है। वैश्विक ई-कॉमर्स व्यापार का आकार लगभग 800 अरब अमेरिकी डॉलर है और वर्ष 2030 तक इसके बढ़कर 2,000 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।  

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