इक्रा ने भारतीय विमानन क्षेत्र का परिदृश्य घटाकर 'नकारात्मक' किया

Edited By Updated: 27 Mar, 2026 01:40 PM

icra downgrades indian aviation sector outlook to  negative

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भारतीय विमानन उद्योग के परिदृश्य को 'स्थिर' से घटाकर शुक्रवार को 'नकारात्मक' कर दिया। एजेंसी ने इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में पैदा हुई बाधाओं का हवाला दिया है। इक्रा ने कहा कि...

मुंबईः रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भारतीय विमानन उद्योग के परिदृश्य को 'स्थिर' से घटाकर शुक्रवार को 'नकारात्मक' कर दिया। एजेंसी ने इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में पैदा हुई बाधाओं का हवाला दिया है। इक्रा ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में भारी गिरावट और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के कारण यह बदलाव किया गया है। एजेंसी के अनुसार, इन कारकों से विमानन कंपनियों पर लागत का दबाव काफी बढ़ने की आशंका है, जबकि दूसरी ओर मांग में गिरावट का जोखिम बना हुआ है। 

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में केवल शून्य से तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। वहीं, भारतीय विमानन कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या सात से नौ प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जो अपेक्षाकृत कमजोर मांग की ओर इशारा करता है। पश्चिम एशिया संकट से पहले, इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में छह से आठ प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में आठ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। हालांकि, अब इन अनुमानों में कमी आने की आशंका है। 

इक्रा ने कहा कि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ानों के रद्द होने और ईंधन अधिभार लगाए जाने के बाद हवाई किराए में बढ़ोतरी से यात्री यातायात वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, उड़ानों के मार्ग बदलने से ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ने की भी आशंका है। एजेंसी ने यह भी कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा हवाई किराये की अधिकतम सीमा हटाए जाने से भी मांग पर बुरा असर पड़ सकता है। टिकट की कीमतों में भारी उछाल से भविष्य में यात्रा की मांग कम हो सकती है। 

इक्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में विमानन उद्योग को 17,000-18,000 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा होने का अनुमान है। ईंधन की कीमतें विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च का 30-40 प्रतिशत हिस्सा होती हैं, जबकि लीज भुगतान और रखरखाव सहित कुल लागत का 35-50 प्रतिशत हिस्सा डॉलर में होता है। ऐसे में रुपए की गिरावट विमानन कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।  

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