CNG वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर, सर्टिफिकेट नहीं दिखाया तो नहीं भर पाएंगे गैस; IGL ने किया नियमों में बदलाव

Edited By Updated: 22 Sep, 2026 09:35 PM

important news for cng vehicle drivers

दिल्ली के एक सीएनजी (CNG) पंप पर हुए हादसे के बाद सुरक्षा नियमों को सख्त कर दिया गया है। इसी कड़ी में गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी भराई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब वाहनों में सीएनजी तभी भरी जाएगी जब...

नई दिल्ली: दिल्ली के एक सीएनजी (CNG) पंप पर हुए हादसे के बाद सुरक्षा नियमों को सख्त कर दिया गया है। इसी कड़ी में गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी भराई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब वाहनों में सीएनजी तभी भरी जाएगी जब वाहन चालक सीएनजी सिलेंडर का वैध हाइड्रो टेस्ट प्रमाण पत्र (Certificate) दिखाएंगे। अब तक हाइड्रो टेस्ट के बाद केवल सिलेंडर पर नई रजिस्टर्ड नंबर प्लेट लगाई जाती थी, लेकिन अब फिजिकल प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।

10 सीएनजी स्टेशनों पर ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू
फर्जी हाइड्रो टेस्ट प्लेटों और फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए IGL ने अपने 10 सीएनजी स्टेशनों पर एक हाईटेक ऑटोमैटेड व्हीकल आइडेंटिफिकेशन एंड वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू किया है। इस प्रणाली के तहत सबसे पहले कैमरे के जरिए वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर कैप्चर किया जाता है। इसके बाद एआई (AI) आधारित एप्लीकेशन के जरिए विवरण को प्रोसेस किया जाता है। प्रणाली पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के ऑनलाइन पोर्टल से सीएनजी सिलेंडर के रिकॉर्ड का मिलान करती है। इससे तुरंत पता चल जाता है कि हाइड्रो टेस्ट प्रमाण पत्र वैध है या उसकी समयावधि समाप्त (एक्सपायर) हो चुकी है।

क्या कहता है 2025 का नया नियम?
गैस सिलेंडर (संशोधित) नियम 2025 के नियम 35 उपनियम (1) के अनुसार, प्रत्येक सीएनजी सिलेंडर को हर 3 साल में एक बार PESO से स्वीकृत सिलेंडर परीक्षण केंद्र से हाइड्रो टेस्ट करवाना अनिवार्य है। हाइड्रो टेस्ट में सिलेंडर, पाइप और टैंक जैसे प्रेशर वाले उपकरणों की मजबूती और गैस लीकेज की गहन जांच की जाती है। यदि वाहन का हाइड्रो टेस्ट एक्सपायर पाया जाता है, तो उसमें सीएनजी नहीं भरी जाएगी।

ग्राहकों की शिकायतें और चिंताएं
नए नियमों से कई वाहन चालकों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। ग्राहकों की शिकायत है कि जिन्होंने दो या तीन साल पहले हाइड्रो टेस्ट करवाया था, उनके पास कागजी सर्टिफिकेट मौजूद होना जरूरी नहीं है, क्योंकि पहले ऐसा नियम नहीं था। साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा था कि जब फर्जी प्लेट बनाई जा सकती है, तो फर्जी प्रमाण पत्र भी बन सकते हैं; इसी कारण IGL ने ऑटोमैटिक तकनीक-आधारित जांच का सहारा लिया है।

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