इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने के लिए FTA का बेहतर फायदा उठाना जरूरीः नीति आयोग रिपोर्ट

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 04:17 PM

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भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने के लिए संरचनात्मक लागत संबंधी चुनौतियों का समाधान करना, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का बेहतर ढंग से फायदा उठाना और रणनीतिक कलपुर्जों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना होगा। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह सुझाव...

बिजनेस डेस्कः भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने के लिए संरचनात्मक लागत संबंधी चुनौतियों का समाधान करना, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का बेहतर ढंग से फायदा उठाना और रणनीतिक कलपुर्जों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना होगा। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है। आयोग की शुक्रवार को जारी 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का दुनियाभर में 4.6 लाख करोड़ डॉलर का बाजार है, लेकिन 2024 में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक प्रतिशत ही रही। कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी कलपुर्जों के बाजार पर चीन, हांगकांग और ताइवान का दबदबा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में कई देशों एवं समूहों के साथ हुए एफटीए से भारतीय उत्पादों की विदेशी बाजार तक पहुंच बेहतर हुई है लेकिन अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में निवेश जुटाने के लिए घरेलू खरीद नीति में अनुमान लगा पाने की क्षमता, निर्यात वित्त और विनियामक सरलीकरण पर अधिक जोर देना होगा। नीति आयोग ने सुझाव दिया कि भारत की रणनीति को असेंबली आधारित वृद्धि से आगे बढ़कर कलपुर्जा-आधारित विनिर्माण की ओर स्थानांतरित होना चाहिए। आपूर्ति पक्ष पर प्रोत्साहनों को घरेलू मूल्य संवर्धन, निरंतर शोध एवं विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने वाले 'एंकर निवेश' से जोड़ा जाना चाहिए। 

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात मुख्यतः अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) एवं नीदरलैंड को होते हैं और इनमें मोबाइल फोन की हिस्सेदारी 52.5 प्रतिशत है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में इंटीग्रेटेड सर्किट, मोबाइल फोन और डेटा प्रोसेसिंग मशीनों की बड़ी हिस्सेदारी है। सितंबर तिमाही में देश के कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात में लगभग 8.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो आयात वृद्धि से अधिक रही। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमापार ई-कॉमर्स 2030 तक निर्यात वृद्धि का प्रमुख माध्यम बन सकता है। 

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