आतिशी मामले पर दिल्ली विधानसभा का कड़ा रुख! पंजाब DGP व जालंधर कमिश्नर को दी डेडलाइन

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 01:19 PM

delhi assembly takes a tough stand on the atishi case

आतिशी वीडियो मामले में दिल्ली विधानसभा की सख्ती नजर आई है।

पंजाब डेस्क : आतिशी वीडियो मामले में दिल्ली विधानसभा की सख्ती नजर आई है। जानकारी के मुताबिक, जालंधर पुलिस कमिश्नर को फिर नोटिस भेजकर 20 फरवरी तक जवाब मांगा है। दिल्ली विधानसभा सचिवालय की ओर से पंजाब के अतिरिक्त सचिव (गृह),  पंजाब डीजीपी गौरव यादव और जालंधर के पुलिस कमिश्नर को पत्र जारी कर निर्धारित समय तक जवाब न देने पर फटकार लगाई है।

गौरतलब है कि, पहले 12 फरवरी तक स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब न मिलने पर अब 20 फरवरी तक अंतिम अवसर दिया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि तय समय में जवाब न आने पर विशेषाधिकार हनन और अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। यह कार्रवाई दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Atishi Marlena से जुड़ा है। उन पर सदन की कार्यवाही के दौरान सिख गुरुओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसी संदर्भ में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।

इस मामले की शिकायत पर आम आदमी पार्टी के नेता इकबाल सिंह बग्गी की शिकायत पर कांग्रेस नेता परगट सिंह, सुखपाल खैहरा के खिलाफ भी FIR की गई थी। आरोप था कि संबंधित वीडियो को आगे प्रसारित किया गया। बाद में पुलिस ने वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई, जिसमें कथित तौर पर छेड़छाड़ की बात सामने आई। इसके बाद मनजिंदर सिंह सिरसा और  कपिल मिश्रा के नाम भी FIR में शामिल किए गए। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया गया है।

दिल्ली विधानसभा ने एक पत्र जारी कर मांगा जवाब

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने विशेषाधिकार से जुड़े मामले में पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ा पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। 13 फरवरी को जारी इस पत्र में स्पष्ट किया गया कि 5 फरवरी 2026 को भेजे गए पूर्व पत्र के बावजूद अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। माननीय समिति ने इस प्रकरण में गौरव यादव (डीजीपी पंजाब), धनप्रीत कौर (सीपी जालंधर) और गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव से 12 फरवरी 2026 तक स्पष्टीकरण मांगा था। तय समयसीमा गुजरने के बावजूद सचिवालय को कोई जवाब नहीं मिला।

विधानसभा सचिव रंजीत सिंह की ओर से भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि सभापति प्रद्युमन सिंह राजपूत ने निर्देश दिया है कि विशेषाधिकार से जुड़े मामलों में जवाब संबंधित अधिकारी को स्वयं देना होता है। व्यक्तिगत रूप से जवाब देना अनिवार्य है। पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी या इनकार को विशेषाधिकार का उल्लंघन और अवमानना माना जा सकता है। तीनों अधिकारियों को 5 फरवरी के पत्र का जवाब देने का एक और, लेकिन अंतिम अवसर दिया गया है। अब उन्हें हर हाल में 20 फरवरी 2026 तक अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।

आपको बता दें कि, 6 जनवरी 2026 में दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के आतिशी ने सिख गुरुओं पर कथित टिप्पणी की थी। शीतकालीन सत्र के दौरान गुरु तेज बहादुर जी की शहीदी पर्व पर चर्चा के दौरान आतिशी ने आपत्तिजनक शब्द कहे थे। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। 

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