Middle East में खतरे की घंटीः  ट्रंप ने ईरान की ओर भेजा दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत, इसी से किया था मादुरो का खेल खत्म!

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 11:40 AM

us orders second aircraft carrier to middle east as iran tensions grow

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को मध्य-पूर्व भेजने का आदेश दिया है। यह तैनाती अमेरिका-ईरान तनाव, गाज़ा युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच हुई है।

Washington: अमेरिका ने मध्य-पूर्व (Middle East)में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को मध्य-पूर्व की ओर रवाना किया गया है। यह युद्धपोत पहले से क्षेत्र में तैनात USS Abraham Lincoln को सपोर्ट करेगा, जिससे पर्सियन गल्फ और आसपास के इलाकों में अमेरिकी सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

 

ईरान को सीधी चेतावनी
यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका के साथ कोई डील नहीं होती, तो तेहरान के लिए हालात “बहुत दर्दनाक” साबित हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सैन्य दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर गंभीरता से लाया जा सकता है। पिछले सप्ताह ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत हुई थी, लेकिन कतर और ओमान की मध्यस्थता के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इसके बाद ही अमेरिका ने यह बड़ा सैन्य कदम उठाया।


 
USS फोर्ड  शक्ति का प्रतीक
USS Gerald R. Ford को दुनिया का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत माना जाता है। इसमें 4,500 से अधिक नौसैनिक तैनात हैं और यह अत्याधुनिक फाइटर जेट्स, गाइडेड-मिसाइल सिस्टम, सर्विलांस एयरक्राफ्ट और एडवांस रडार तकनीक से लैस है। यह पोत जून 2025 से समुद्र में तैनात है और अब सीधे मध्य-पूर्व भेजा गया है, जिससे इसके क्रू की तैनाती अवधि आठ महीनों से ज्यादा हो जाएगी। USS फोर्ड इससे पहले कैरिबियन क्षेत्र में तैनात था, जहां अमेरिका ने इसी युद्धपोत की मौजूदगी के जरिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro की सरकार पर कड़ा दबाव बनाया था। अब उसी रणनीति को ईरान के खिलाफ लागू किया जा रहा है।

 

क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका
अरब देशों और क्षेत्रीय विश्लेषकों ने अमेरिका को आगाह किया है कि मध्य-पूर्व में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई पूरे इलाके को युद्ध की चपेट में ले सकती है। खासतौर पर तब, जब गाज़ा में जारी Israel–Hamas war के कारण पूरा क्षेत्र पहले से ही तनाव और अस्थिरता से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि USS फोर्ड की तैनाती केवल सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश है । अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी विकल्प से पीछे नहीं हटेगा। यह कदम ट्रंप की “सख्त सौदेबाजी” नीति को भी मजबूती देता है।
 

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