Gold Reserve Shift: RBI का बड़ा कदम, विदेशों में रखा अपना सोना वापस ला रहा भारत, जानिए क्यों?

Edited By Updated: 02 May, 2026 05:20 PM

india recalls its gold from overseas boosting domestic gold reserves

देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक तेजी से विदेशों में रखा अपना सोना भारत वापस ला रहा है। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच यह कदम देश की वित्तीय...

बिजनेस डेस्कः देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक तेजी से विदेशों में रखा अपना सोना भारत वापस ला रहा है। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच यह कदम देश की वित्तीय मजबूती को सुरक्षित रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

क्यों बदली जा रही है रणनीति?

RBI के ताजा आंकड़ों (अक्टूबर 2025-मार्च 2026) के अनुसार, भारत के पास कुल 880.52 टन सोना है। इसमें से करीब 77% यानी लगभग 680 टन अब देश के भीतर ही रखा गया है। वहीं करीब 197.67 टन सोना Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास है।

महज छह महीनों में 104 टन से ज्यादा सोना भारत लाया गया है। तुलना करें तो मार्च 2023 तक देश का सिर्फ 37% सोना ही भारत में था, जिससे साफ है कि यह बदलाव काफी तेज़ी से किया गया है।

विदेशी भंडार पर क्यों बढ़ी चिंता?

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा रूस व अफगानिस्तान की संपत्तियों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को सतर्क कर दिया है। इससे यह साफ हो गया कि विदेशों में रखी संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोना तभी असली सुरक्षा देता है जब वह देश के अपने नियंत्रण में हो। यही कारण है कि भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.9% से बढ़कर 16.7% हो गई है, भले ही कुल भंडार में कुछ गिरावट आई हो।

दुनिया भी बदल रही रणनीति

भारत अकेला नहीं है, कई बड़े देश भी अब अपना सोना वापस ला रहे हैं:
फ्रांस: Bank of France ने 129 टन सोना न्यूयॉर्क से पेरिस शिफ्ट किया
जर्मनी: 2014-2017 के बीच 300 टन सोना वापस मंगाया
पोलैंड: इसे “रणनीतिक स्वायत्तता” का हिस्सा मानकर कदम उठा रहा है
चेक रिपब्लिक: अभी भी लेन-देन की सुविधा के लिए लंदन पर निर्भर

यह पूरा कदम सिर्फ सोना इधर-उधर करने का नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का है। अगर वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा संकट आता है, तो देश के पास अपनी संपत्ति पर सीधा नियंत्रण होना बेहद जरूरी होता है।

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