Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Apr, 2026 03:15 PM

सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न देने वाली सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) में निवेश करते समय टाइमिंग बेहद अहम होती है। अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में ₹1.5 लाख का पूरा निवेश करना चाहते हैं, तो 5 अप्रैल तक पैसा जमा करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।...
बिजनेस डेस्कः सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न देने वाली सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) में निवेश करते समय टाइमिंग बेहद अहम होती है। अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में ₹1.5 लाख का पूरा निवेश करना चाहते हैं, तो 5 अप्रैल तक पैसा जमा करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अप्रैल-जून तिमाही के लिए इसकी ब्याज दर 7.1% तय की गई है। इस छोटी सी समय सीमा का पालन ना करने पर आपको मैच्योरिटी पर भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, PPF में ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख और महीने के अंत के बीच के न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है। यदि निवेशक 5 अप्रैल तक पैसा जमा कर देते हैं, तो उन्हें पूरे साल यानी 12 महीनों का ब्याज मिलता है। वहीं, 6 अप्रैल या उसके बाद निवेश करने पर अप्रैल महीने का ब्याज नहीं मिलता और रिटर्न सिर्फ 11 महीनों का रह जाता है।
पहले साल में यह अंतर छोटा लग सकता है लेकिन लंबे समय में इसका बड़ा असर देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक हर साल 1 से 5 अप्रैल के बीच ₹1.5 लाख जमा करता है, तो 15 साल बाद 7.1% ब्याज दर के हिसाब से फंड करीब ₹40.68 लाख तक पहुंच सकता है।
इसके विपरीत, अगर यही निवेश साल के अंत में किया जाए, तो मैच्योरिटी रकम घटकर लगभग ₹37.80 लाख रह जाती है यानी सिर्फ टाइमिंग की वजह से करीब ₹3 लाख का सीधा नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस अंतर की वजह कंपाउंडिंग है। जल्दी निवेश करने पर पैसे को ज्यादा समय तक बढ़ने का मौका मिलता है, जिसे ‘16-इयर इफेक्ट’ भी कहा जाता है।