कच्चे तेल की महंगाई से सरकारी तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ का नुकसान

Edited By Updated: 08 May, 2026 04:05 PM

public sector petroleum companies have incurred losses of 30 000 crore since

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को मध्य मार्च से अब तक लगभग 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सार्वजनिक...

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को मध्य मार्च से अब तक लगभग 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने इस संकट के दौरान भी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी, जबकि कच्चे माल की लागत में कई चरणों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। 

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल एवं गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बने रहने से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आया। इस दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद भारत में 28 फरवरी के बाद से खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। मामले से परिचित सूत्रों ने कहा कि अप्रैल में पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 25 रुपए प्रति लीटर का नुकसान दर्ज किया गया। इस तरह तेल कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ा।

हालांकि सरकारी हस्तक्षेप के तहत उत्पाद शुल्क में कटौती से इन कंपनियों को कुछ राहत मिली और वे कुल नुकसान को लगभग 30,000 करोड़ रुपए तक सीमित रख पाने में सफल रहीं। सूत्रों ने कहा कि यदि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती नहीं की होती, तो तेल कंपनियों का यह नुकसान बढ़कर करीब 62,500 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता था। सूत्रों के मुताबिक, परिवहन लागत, आपातकालीन कच्चे तेल की खरीद, बीमा प्रीमियम और रिफाइनरी समायोजन जैसी अतिरिक्त लागतों ने भी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया। हालांकि देशभर में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 28 फरवरी को पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन संघर्ष तेज होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कीमतों में तेज उछाल आया। हालत यह हो गई कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ समय के लिए लगभग 144 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। हालांकि तनाव थमने की उम्मीद से अब यह नरम होकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ चुका है।

 

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