Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 May, 2026 05:58 PM

सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी रियल एस्टेट संपत्तियों से मिलने वाले प्रतिफल या रिटर्न को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित रही है। इसके साथ ही बीमा कंपनी 60,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अपनी विशाल संपत्तियों के...
नई दिल्लीः सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी रियल एस्टेट संपत्तियों से मिलने वाले प्रतिफल या रिटर्न को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित रही है। इसके साथ ही बीमा कंपनी 60,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अपनी विशाल संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए अलग अनुषंगी कंपनी बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।
एलआईसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक आर. दुरईस्वामी ने कहा, ''हमारे पास काफी रियल एस्टेट संपत्तियां हैं, जिनमें कुछ विरासत में मिली हैं और कुछ पिछले 70 वर्षों में खरीदी गई हैं। इनका उपयोग अपने कामकाज के साथ निवेश के रूप में भी किया जाता है, जिससे हमें आय होती है।'' उन्होंने कहा कि एलआईसी प्रत्येक संपत्ति को निवेश के रूप में देखती है और उम्मीद करती है कि हर संपत्ति पॉलिसीधारकों और शेयरधारकों के लिए बेहतर प्रतिफल में योगदान दे।
दुरईस्वामी ने कहा कि हाल के समय में एलआईसी ने अपने रियल एस्टेट पोर्टफोलियो की व्यापक समीक्षा शुरू की है, ताकि उससे मिलने वाले रिटर्न और आय का आकलन किया जा सके तथा सुधार की संभावनाएं तलाशी जा सकें। उन्होंने कहा कि इस विस्तृत समीक्षा का उद्देश्य पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर प्रतिफल सुनिश्चित करने के साथ कंपनी की कुल लाभप्रदता को मजबूत करना है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए किसी लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया गया है, लेकिन मौजूदा स्थिति से बेहतर प्रदर्शन करने पर जोर है।
उन्होंने कहा, ''स्व-उपयोग वाली संपत्तियां भी संगठन की छवि मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए हमारी शाखाओं और स्वामित्व वाली इमारतों के माहौल और सुविधाओं को बेहतर बनाना प्रमुख प्राथमिकता बन गया है।'' दुरईस्वामी ने कहा कि एलआईसी किराये पर दी गई संपत्तियों की भी समीक्षा कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनसे उचित राजस्व प्राप्त हो। रियल एस्टेट कारोबार के अधिक प्रभावी प्रबंधन के लिए अलग अनुषंगी कंपनी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''हमारे सामने सभी विकल्प खुले हैं... सभी विकल्पों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले समय में आगे कदम उठाए जाएंगे।''
केंद्र सरकार द्वारा एलआईसी में हिस्सेदारी और घटाने की तैयारी के सवाल पर उन्होंने कहा, ''हम पहले दिन से इसके लिए तैयार हैं। जब हमने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी शुरू की थी, तभी से भविष्य की ऐसी कार्रवाइयों के लिए भी तैयार थे। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार को लेना है।'' उन्होंने कहा कि जैसे ही हिस्सेदारी बिक्री के समय और मात्रा पर निर्णय होगा, एलआईसी सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी। एलआईसी 2022 में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लेकर आई थी, जो उस समय आकार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा आईपीओ था। सरकार ने इसमें 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपए जुटाए थे।