Edited By jyoti choudhary,Updated: 16 Mar, 2026 04:01 PM

ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के कई डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कमी के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि स्थिति...
बिजनेस डेस्कः ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के कई डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कमी के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण खासतौर पर छोटी और मध्यम स्तर की डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना मुश्किल होता जा रहा है।
पैकेजिंग मटेरियल की भी कमी
डेयरी उद्योग के सामने एक और बड़ी समस्या दूध के पैकेट और कार्टन की कमी बनकर सामने आई है। दूध के पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है।
Govardhan Dairy के संस्थापक Devendra Shah के अनुसार फिलहाल उनके पास पैकेजिंग सामग्री का स्टॉक सिर्फ करीब 10 दिनों के लिए बचा है। अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो दूध की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
चेंबूर स्थित Suresh Dairy के मैनेजर Sharib Sheikh ने भी कहा कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो डेयरी उद्योग बड़े संकट में फंस सकता है।
होटल-रेस्टोरेंट से मांग घटी
गैस की कमी का असर दूध की मांग पर भी पड़ रहा है। होटल और रेस्टोरेंट खुद एलपीजी संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्होंने दूध के ऑर्डर कम कर दिए हैं। Bombay Milk Producers Association के अध्यक्ष C. K. Singh के मुताबिक हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हो गए। छोटे डेयरी संचालकों के पास स्टोरेज की सुविधा सीमित है, इसलिए वे दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं।
बड़ी डेयरियों पर फिलहाल कम असर
राहत की बात यह है कि बड़ी डेयरी कंपनियों पर फिलहाल इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। Amul के एमडी Jayen Mehta के अनुसार उनकी करीब 80% गैस जरूरतें पूरी हो रही हैं, जबकि बाकी जरूरतें डीजल और अन्य ईंधनों से पूरी की जा रही हैं।
इसी तरह Mother Dairy भी अपने प्रोसेसिंग सेंटर्स पर PNG और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे फिलहाल उनकी दूध सप्लाई सामान्य बनी हुई है।